
फाइल फोटो पत्रिका
Income Tax Action : जोधपुर शहर में महंगी प्रॉपर्टी खरीदने वालों पर आयकर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 50 लाख रुपए से अधिक मूल्य की संपत्ति खरीदने वाले करीब 60 लोगों को विभाग ने नोटिस जारी कर उनकी घोषित आय और वास्तविक निवेश के बीच अंतर स्पष्ट करने को कहा है। जांच का दायरा पिछले छह वित्तीय वर्षों के बड़े सौदों तक फैला है, लेकिन विशेष फोकस वर्ष 2019-20 के लेनदेन पर है, क्योंकि इस अवधि से जुड़े मामलों की वैधानिक जांच सीमा 31 मार्च को समाप्त हो रही है।
विभाग ने जोधपुर विकास प्राधिकरण से 50 लाख रुपए से अधिक की रजिस्ट्री और संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं। इन सौदों का मिलान आयकर रिटर्न, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और घोषित आय से किया जा रहा है। प्रारंभिक विश्लेषण में 15 से 20 प्रतिशत मामलों में आय छिपाने या वास्तविक सौदे की राशि कम दर्शाने की आशंका सामने आई है। ऐसे प्रकरणों में संबंधित व्यक्तियों से आय के वैध स्रोत का प्रमाण मांगा गया है।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कर निर्धारण पुनरीक्षण, जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
जानकारों के अनुसार, कई मामलों में संपत्ति का बाजार मूल्य और रजिस्ट्री मूल्य के बीच उल्लेखनीय अंतर पाया गया है। कुछ खरीदारों ने आयकर रिटर्न में घोषित आय की तुलना में अधिक निवेश किया है। विभाग अब बैंक खातों, ऋण स्रोतों और नकद लेनदेन की भी पड़ताल कर रहा है।
केंद्र सरकार की हालिया समीक्षा में देशभर में बड़े प्रॉपर्टी सौदों में संभावित कर चोरी का अनुमान सैंकड़ों करोड़ रुपए से अधिक जताया गया है। इसी के तहत आयकर विभाग ने राज्यों में विशेष जांच अभियान शुरू किया है। जोधपुर में जारी नोटिस इसी व्यापक कार्रवाई का हिस्सा माने जा रहे हैं।
Published on:
23 Feb 2026 09:49 am
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