
जोधपुर . जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर और कार्यवाहक रजिस्ट्रार डॉ. प्रदीपकुमार शर्मा (बी) ने शुक्रवार को स्वयं को ही फाइनल नो ड्यूज जारी कर दिया। जबकि प्रो. शर्मा ने मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडी) को 97 लाख रुपए सहित 2016-17 में कार्यवाहक निदेशक पद पर रहते किए गए खर्चे का हिसाब अभी तक नहीं दिया है। एचआरडी ने डॉ. शर्मा को किसी भी तरह का नो ड्यूज देने से इनकार किया है। डॉ. शर्मा सहित विवि के 19 शिक्षक 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।
एक वर्ष से विवि में कार्यवाहक रजिस्ट्रार पद पर कार्यरत डॉ. शर्मा ने सेवानिवृत्त से पहले फाइनल नो ड्यूज के लिए फाइल विवि के वित्तीय सलाहकार दशरथ सोलंकी के पास भेजी। लेकिन वित्तीय सलाहकार ने यह कहते हुए हस्ताक्षर करने से मना कर दिया कि रजिस्ट्रार का पद उनसे बड़ा होता है। तब डॉ. शर्मा ने ही खुद को नो ड्यूज जारी कर दिया। इस नो ड्यूज पर कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा के काउंटर साइन होना बाकी है।
मेरा हिसाब कौन देगा
डॉ. शर्मा ने 2012 से 2015 के दौरान यूजीसी से मिले 97 लाख रुपए के हिसाब में कई अनियमितताएं की है। यूजीसी नियमों के विरुद्ध स्वयं ही ऑनरेरियम उठा लिया। इसका हिसाब भी यूजीसी को देना है। 2016 से 2017 के दौरान मेरे निदेशक रहते हुए भी उन्होंने पैसा उठाकर खर्च कर दिया। इसका हिसाब भी वे नहीं दे रहे। यही कारण है कि यूजीसी से एचआरडी केंद्र को मिलने वाली 80 लाख रुपए की ग्रांट अटकी हुई है।
डॉ. राजेश दूबे, निदेशक, एचआरडी केंद्र जेएनवीयू
कुलपति साइन करेंगे
मेरे नो ड्यूज देने से कुछ नहीं होता है। इस पर अंतिम हस्ताक्षर कुलपति करेंगे। एचआरडी केंद्र के 97 लाख की ऑडिट करवाकर रिपोर्ट यूजीसी भेजी जा चुकी है। मेरा किसी तरह का हिसाब बकाया नहीं है।
प्रो. प्रदीपकुमार शर्मा (बी), कार्यवाहक रजिस्ट्रार जेएनवीय