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जोधपुर डिस्कॉम के सेंट्रल स्टोर से सामान उठा कबाड़ में बेचा, अब अधिकारियों पर गिरेगी बिजली

दो माह पहले डिस्कॉम के सेंट्रल स्टोर से पांच लाख से अधिक कीमत की कंडक्टर केबल और ट्रांसफार्मर झालामंड सहायक अभियंता कार्यालय के स्टोर में सप्लाई होने के लिए निकले थे। लेकिन बीच में एक कबाड़ के गोदाम में ही उनको उतार कर बेचने के प्रयास किए गए। इस पर डिस्कॉम की टीम ने पकड़ लिया था।
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जोधपुर

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Harshwardhan Singh Bhati

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Updated: 29 Nov 2019, 12:10 PM IST

jodhpur discom officers sold electrical equipment from central store

जोधपुर डिस्कॉम के सेंट्रल स्टोर से सामान उठा कबाड़ में बेचा, अब अधिकारियों पर गिरेगी बिजली

अविनाश केवलिया/जोधपुर. जोधपुर डिस्कॉम के सेंट्रल स्टोर से सामान उठा कर कबाड़ के गोदाम में बेच देने के मामले में जांच कमेटी ने कई सवाल खड़े किए। सीएमओ से आए जांच के निर्देश के बाद इस कमेटी की अनुशंसा पर अब कई संदिग्ध सहायक अभियंता कार्यालय के स्टोर भी ‘रडार’ पर रखे हैं। गौरतलब है कि इस मामले में कबाड़ गोदाम मालिक और डिस्कॉम के तकनीकी सहायक को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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दरअसल, दो माह पहले डिस्कॉम के सेंट्रल स्टोर से पांच लाख से अधिक कीमत की कंडक्टर केबल और ट्रांसफार्मर झालामंड सहायक अभियंता कार्यालय के स्टोर में सप्लाई होने के लिए निकले थे। लेकिन बीच में एक कबाड़ के गोदाम में ही उनको उतार कर बेचने के प्रयास किए गए। इस पर डिस्कॉम की टीम ने पकड़ लिया था।

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मामला पुलिस में दर्ज हुआ और पूरे प्रकरण की विभागीय जांच की मांग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी की गई। सीएमओ ने जांच कराने के निर्देश दिए गए। ऐसे में विभागीय कमेटी ने कई अनुशंसा की है। अब कई ऐसे संदिग्ध सहायक अभियंता कार्यालय के स्टोर के रिकॉर्ड की जांच भी शुरू की गई है।

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कई कमियां मिली
- स्टोर व नए कनेक्शन देने के लिए जिम्मेदारी मंत्रालयिक कर्मचारी की बजाय तकनीकी अधिकारी को देना गलत।
- जो माल सेंट्रल स्टोर से उठा उसका संबंधित एईएन कार्यालय में इंद्राज नहीं मिला।
- स्टोर में कैमरे लगे थे लेकिन उसी दो दिनों की रिकॉर्डिंग खराब पाई गई।
- जिस दिन छापा पड़ा उस दिन सामान जब्त नहीं किया, एक-दो दिन बाद में किया।

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कर्मचारी निलंबित, एईएन एपीओ
इस प्रकरण में तकनीकी कर्मचारी महेशचंद्र माथुर को प्रारंभिक तौर पर दोषी माना था। उसे निलंबित भी किया गया। पुलिस जांच में भी उसे गिरफ्तार किया गया। संबंधित सहायक अभियंता महेश नागर को भी प्रशासनिक जिम्मेदार मानते हुए एपीओ किया गया था।

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इनका कहना...
इस जांच की रिपोर्ट के बाद कर्मचारी को तो हटाया, लेकिन अधिकारी को बचाया जा रहा है। सही कार्रवाई नहीं होती है तो हम एसीबी तक मामले को ले जाएंगे।
- जगदीश दाधीच, प्रदेश उपाध्यक्ष, राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ

इस प्रकरण के बाद हम दूसरे कार्यालयों के स्टोर की जांच करवा रहे हैं। जो संदिग्ध है उस पर पूरे महीने नजर रखते हैं।
- एम.एस चारण, अधीक्षण अभियंता, जोधपुर डिस्कॉम सिटी