10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

प्रदेश का जोधपुर दूसरा बड़ा शहर, लेकिन सफाई में हमारी प्रदेश में 9 वीं और देश में 243 वीं रैंक

स्वच्छता सर्वेक्षण में जोधपुर की शर्मनाक स्थिति
3 min read
Google source verification
jodhpur-second-largest-city-of-the-state-but-in-cleanliness-9th-in-ou

प्रदेश का जोधपुर दूसरा बड़ा शहर, लेकिन सफाई में हमारी प्रदेश में 9 वीं और देश में 243 वीं रैंक

फैक्ट फाइल

सिटीजन पार्टिसिपेट फीडबैक - 1188

स्टार रैटिंग- 1 स्टार

शहर की जनसंख्या- 10,33,756

वार्ड संख्या - 65

जोधपुर का रिपोर्ट कार्ड

वर्ष-2019

शहर - रैंक

425-243

वर्ष-2018

शहर - रैंक

485-188

वर्ष-2017

शहर - रैंक

434-209

वर्ष-2016

शहर - रैंक

73-57

जोधपुर. स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की रैकिंग ने इस बार जोधपुर को गत वर्ष 2018 की रैकिंग से निचले पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया है। सर्वेक्षण के जारी आंकड़ों में जोधपुर की रैंक 243 वें स्थान पर आई है। जोधपुर का स्कोर पांच हजार में से 2091.88 पर रहा। गत वर्ष 2018 में जोधपुर की 188 वीं रैंक थी। इस बार रैकिंग गिरने की बड़ी वजह निगम में शुरू से स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर कोई तैयारी नहीं होना भी है। ऐनवक्त पर निगम अधिकारियों के चेतने के कारण जोधपुर टॉप 200 में भी जगह नहीं बना पाया। शर्म की बात तो ये रही कि प्रदेश में दूसरा सबसे बड़ा शहर माने जाने वाला जोधपुर राजस्थान में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैकिंग में नौवें पायदान पर रहा। जबकि स्वच्छता में जोधपुर से आगे पड़ोसी जिला पाली रहा। पाली को स्वच्छता सर्वेक्षण में 213 वीं रैंक राष्ट्रीय स्तर पर हासिल हुई हैं।

आचार संहिता का बहाना, सच्चाई पूरे साल मेहनत नहीं

नगर निगम के ज्यादातर जिम्मेदारों का कहना है कि आचार संहिता के कारण उनके अधिकारी कार्य में व्यस्त हो गए। टीम जनवरी माह में सर्वप्रथम जोधपुर आ गई। जबकि चुनाव का सीजन मध्यप्रदेश में भी था, वहां तो इंदौर शहर स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल रहा है।

खुद का प्रचार भी ढंग से नहीं कर पाए

नगर निगम को स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर शहर भर में होर्डिंग बोर्ड व विज्ञापन प्रदर्शित करने थे। ये काम देरी से शुरू किया। इसके अलावा सिटीजन फीडबैक के नंबर का भी हमें प्रचार करना था। जिस पर कॉल देकर लोग अपनी राय देते। इस मामले में हमें ना के बराबर नंबर मिले हैं। इस कार्य में भी निगम अधिकारियों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। सिटीजन फीडबैक के मामले में पिछली बार भी नगर निगम पिछड़ा था।

--

स्टार वन रैटिंग दी, जयपुर से आई टीम

नगर निगम ने डोर टू डोर कलक्शन शुरू नहीं होने व कई खामियों को देख खुद को रैटिंग 1 स्टार दी। इस कारण जयपुर से टीम ने आकर सर्वेक्षण किया। जानकारों की मानें तो यदि 3 स्टार रैटिंग देते तो दिल्ली से स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम आती। डोर टू डोर 60 प्रतिशत होने पर 3 स्टार का दावा किया जाता है।

---------

बोले शहरवासी

नगर निगम सफाई के मामले में कोताही बरतता है। इस कारण ऐसे हालात हुए हैं।

- कैलाश पंवार

करोड़ों रुपए सफाई के नाम पर खर्च होते हैं, आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद रैंकिंग क्यों नहीं सुधर रही है ?

- शिवदत्तसिंह राठौड़

समाचारों में पढ़ते है कि इतने सफाईकर्मचारी नगर निगम ने लगा दिए। उसके बावजूद ढर्रा नहीं सुधर रहा है।

- मोहनलाल परिहार

सिटीजन फीडबैक के लिए हमें कोई जानकारी नहीं थी। जानकारी होती तो शहर के लिए वोटिंग भी करते।

- चेतन सांखला

ये बड़ी वजह पीछे रहने की

1. कई वार्डों में दो बार सफाई के नाम पर छलावा होता है, सफाई बराबर नहीं होती।

2. डोर टू डोर कलक्शन स्कीम ढंग से शुरू नहीं हो पाई।

3. वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू नहीं हो पाया।

4. निगम की समस्त सेवाएं ऑनलाइन नहीं हुई।

5. सिटीजन फीडबैक जैसे मामले में निगम ने लोगों को जागरुक नहीं किया।

6. रोज सौ किलो कचरा जेनरेट करने वाले होटलों के बाहर प्लांट अभी तक नहीं लगे।

----------

प्रदेश के ये जिले हमसे आगे

जिला - रैंक

जयपुर - 44

उदयपुर - 137

अलवर - 186

सीकर - 204

पाली - 213

टोंक - 215

गंगापुर सिटी - 221

सुजानगढ़ - 237

---------

सिटीजन फीडबैक

यूएलबी स्कोर - 734.16

स्टेट एवरेज - 793.33

नेशनल - 780

--------------

बोले महापौर

रैकिंग गिरने के 3 प्रमुख कारण रहे है। पहला डोर टू डोर पूरा शुरू नहीं हुआ। अभी केवल 17 वार्डों में डोर टू डोर हुआ है। वेस्ट टू एनर्जी का प्लांट शुरू नहीं हो पाया। तीसरा कारण आचार संहिता के कारण जनप्रतिनिधियों की भागीदारी कम हो गई। अधिकारी चुनाव में लग गए थे। जो कमियां रही है। उनमें सुधार लाएंगे। जबकि दस लाख की बडी आबादी वाले शहर में हमारी रैंक दूसरी आई है।

- घनश्याम ओझा, महापौर

आयुक्त का कहना

डोर टू डोर में कमजोर स्थिति रही है। अब शेष का कार्य प्रक्रिया में है। आचार संहिता में टैंडर खुल नहीं पाए थे। वैसे इंदौर में पहले से डोर टू डोर चल रहा है। इस कारण वहां स्थिति मजबूत थी।

- सुरेश कुमार ओला, आयुक्त, नगर निगम