
पूर्व CM अशोक गहलोत से पैर छूता हुआ शख्स (Snapgrab photo quality enhanced by Ai)
जोधपुर में नगर निगम चुनाव 2026 के मतदान के दिन एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने पूरे प्रदेश के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी पत्नी सुनीता गहलोत, बेटे वैभव गहलोत और बहू हिमांशी गहलोत के साथ महामंदिर क्षेत्र स्थित वर्धमान जैन विद्यालय के पोलिंग बूथ पर अपना वोट डालने पहुंचे थे। मतदान प्रक्रिया पूरी कर बाहर निकलते समय पोलिंग बूथ के अंदर गहलोत के पैर छूने का एक वीडियो सामने आया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत इसे मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि ड्यूटी पर तैनात पोलिंग पार्टी के सरकारी कर्मचारी ने पूर्व सीएम के पैर छूकर आचार संहिता का उल्लंघन किया है। हालांकि, जिला निर्वाचन आयोग द्वारा कराई गई त्वरित प्राथमिक जांच में यह पूरा मामला कुछ और ही निकला और बीजेपी द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और निराधार पाए गए।
जिला निर्वाचन अधिकारी और स्थानीय पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई गहन पड़ताल और सीसीटीवी फुटेज के सत्यापन के बाद यह साफ हो गया है कि मतदान केंद्र पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैर किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग लोगों ने छुए थे। सबसे बड़ी बात यह है कि पैर छूने वाले इन तीन लोगों में से कोई भी चुनाव ड्यूटी पर तैनात सरकारी पोलिंग कर्मचारी नहीं था।
इस प्रशासनिक पड़ताल के बाद बीजेपी के आरोपों की हवा निकल गई है और कांग्रेस पार्टी ने इसे जननायक के प्रति आम जनता और समर्थकों का प्राकृतिक मान-सम्मान करार दिया है।
प्रशासनिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर जोधपुर के वर्धमान जैन स्कूल बूथ पर घटी इस घटना की पूरी क्रोनोलॉजी और तीनों व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार सामने आई है:
1. पहला व्यक्ति (सामान्य voter): पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जब मतदान केंद्र के अंदर अपनी वोटिंग औपचारिकताएं पूरी कर बाहर निकल रहे थे, तभी वहां मौजूद एक आम मतदाता (Voter) ने आगे बढ़कर उनके पांव छुए और उनका आशीर्वाद लिया।
2. दूसरा व्यक्ति (निर्दलीय प्रत्याशी का बूथ एजेंट): इसके तुरंत बाद उसी पोलिंग बूथ पर तैनात निर्दलीय उम्मीदवार प्रकाश बागोरिया के बूथ एजेंट (Polling Agent) ने पूर्व सीएम गहलोत के प्रति आदर व्यक्त करते हुए उनके पांव छुए।
3. तीसरा व्यक्ति (निर्दलीय प्रत्याशी का चुनावी अभिकर्ता): तीसरे क्रम में निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बागोरिया के मुख्य चुनावी अभिकर्ता (Election Agent) ने अशोक गहलोत के पास आकर उनके पैर छूकर सम्मान जताया।
घटना की शुरुआती तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद राजस्थान बीजेपी के विधि प्रकोष्ठ ने इसे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर हमला बताया था। बीजेपी नेताओं का आरोप था कि पोलिंग बूथ की मेज पर बैठा सरकारी कर्मचारी किसी एक दल के शीर्ष नेता के सामने झुक रहा है, जिससे वहां आने वाले अन्य आम मतदाताओं की मानसिकता प्रभावित हो सकती है।
बीजेपी ने जोधपुर कलेक्टर और राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर संबंधित पोलिंग टीम के खिलाफ अविलंब निलंबन और दंडात्मक अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की थी।
बीजेपी की आधिकारिक शिकायत मिलते ही जोधपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे। सेक्टर ऑफिसर और बूथ के वीडियोग्राफी फुटेज की बारीकी से पड़ताल की गई।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि चुनाव ड्यूटी में तैनात पोलिंग पार्टी का कोई भी सदस्य अपनी कुर्सी से नहीं उठा था और न ही किसी सरकारी कर्मचारी ने पूर्व सीएम के पैर छुए थे। पैर छूने वाले तीनों लोग वहां मौजूद आम नागरिक और अधिकृत पोलिंग एजेंट थे।
जिला निर्वाचन आयोग ने प्राथमिक जांच के बाद स्पष्ट कर दिया है कि आचार संहिता या चुनाव नियमों का ऐसा कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, जिसमें किसी सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता हो।
जांच रिपोर्ट में प्रशासनिक क्लीयरेंस मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा हमला बोला है। जोधपुर जिला कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने कहा कि बीजेपी चुनाव में अपनी संभावित हार को देखते हुए बौखलाहट में झूठी और भ्रामक खबरें फैला रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अशोक गहलोत राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं और जोधपुर उनका गृह क्षेत्र है। उन्हें एक बुजुर्ग, पिता तुल्य जननायक और पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में हर वर्ग से प्यार और सम्मान मिलता है। किसी निर्दलीय प्रत्याशी के एजेंट या आम वोटर द्वारा सम्मान में पैर छूना एक भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, जिसे बीजेपी ने गलत रंग देने की नाकाम कोशिश की।
Updated on:
11 Sept 2026 03:42 pm
Published on:
11 Sept 2026 03:42 pm
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