
भगत की कोठी रेलवे स्टेशन। फोटो: पत्रिका
Bhagat Ki Kothi Railway Station: जोधपुर। जोधपुर में बढ़ते रेल यातायात के साथ अब ट्रेनों के संचालन और रखरखाव का ढांचा भी बड़े बदलाव की ओर है। बढ़ते यात्रीभार, नई ट्रेनों और आधुनिक कोचों की जरूरतों को देखते हुए भगत की कोठी रेलवे स्टेशन को करीब 397.69 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक मेगा कोचिंग टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रतिदिन 10 हजार से अधिक यात्रियों की आवाजाही वाले इस स्टेशन को आने वाले वर्षों में जोधपुर के बड़े रेल परिचालन केंद्र के रूप में तैयार करने की योजना है।
परियोजना के तहत जोधपुर के भगत की कोठी रेलवे स्टेशन पर तीन नए पूर्ण लंबाई के प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे। वर्तमान में तीन प्लेटफॉर्म हैं, ऐसे में निर्माण पूरा होने के बाद इनकी संख्या छह हो जाएगी। इसके साथ तीन आधुनिक कवर शेड युक्त अनुरक्षण पिट लाइनें, दो सिक लाइनें, एक व्हील लेथ लाइन, चार स्टेबलिंग लाइनें और दो वॉशिंग-कम-स्टेबलिंग लाइनें विकसित की जाएंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए कार्यालय भवन, आधुनिक स्टोर, आंतरिक सड़कें, फुटओवर ब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, दूसरा प्रवेश द्वार और सुव्यवस्थित सर्कुलेटिंग एरिया भी विकसित किया जाएगा।
आधुनिक पिट लाइनों और व्हील लेथ जैसी सुविधाओं से ट्रेनों के रखरखाव में लगने वाला समय कम होगा। यहां कोचों की ब्रेक प्रणाली, सस्पेंशन, एयर पाइप, अंडरगियर, पहियों और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच आधुनिक तरीके से की जा सकेगी। इससे कम समय में अधिक रेक तैयार करने और ट्रेनों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
परियोजना पूरी होने के बाद भगत की कोठी उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रमुख कोच अनुरक्षण और परिचालन केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ने के साथ जोधपुर का रेल नेटवर्क और तकनीकी ढांचा भी मजबूत होगा।
-3 आधुनिक कवर शेड युक्त पिट लाइनें।
-3 पूर्ण लंबाई प्लेटफॉर्म।
-2 सिक लाइनें।
-1 व्हील लेथ लाइन।
-4 स्टेबलिंग लाइनें।
-2 वॉशिंग-कम-स्टेबलिंग लाइनें।
-लिफ्ट, एस्केलेटर, एफओबी, दूसरा प्रवेश द्वार और आधुनिक सर्कुलेटिंग एरिया जैसी यात्री सुविधाओं का विकास
397.69 करोड़ रुपए की लागत से विकसित हो रहा भगत की कोठी मेगा कोचिंग टर्मिनल जोधपुर मंडल की अनुरक्षण क्षमता को नई मजबूती देगा। आधुनिक पिट लाइन, व्हील लेथ, स्टेबलिंग व वॉशिंग सुविधाओं के साथ तीन नए प्लेटफॉर्म विकसित होंगे। इससे भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार होगा।
-अनुराग त्रिपाठी, डीआरएम
Updated on:
18 Aug 2026 02:30 pm
Published on:
18 Aug 2026 02:29 pm
