
जोधपुर में हुए हादसे तो जागा निगम प्रशासन, नोटिस दिए और फिर अपने हाल पर छोड़ दिया शहर को
- स्थाई कार्रवाई नहीं होने से फिर शुरू हो जाता है निर्माण
जोधपुर. शहर में हादसे हुए तो अवैध निर्माण पर कार्रवाई का अभियान शुरू हुआ। कई निर्माण चिह्नित हुए और नोटिस जारी हुए, लेकिन इसके बाद भी शहर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी है। इसका प्रमुख कारण नगरीय निकायों का सिर्फ नोटिस तक सीमित रहना ही है। नगर निगम सीमा क्षेत्र में एक से 65 वार्ड में अवैध निर्माण अभी भी जारी है। शहर में अवैध निर्माण की वजह से करीब तीन हादसे हो चुके है, बावजूद इसके इन निर्माण पर रोक नहीं लगी। इन हादसों के बाद निगम चेता और वार्ड प्रभारियों को वार्डों में चल रहे निर्माण कार्य की सूची तैयार करने के आदेश दिए, जबकि सभी निर्माण कार्य का निगम में ब्यौरा होना चाहिए। इधर, अवैध निर्माण की सारी हदें पार कर रायबहादुर मार्केट के पास नाले को हटा कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। लोगों के विरोध के बाद निगम अधिकारियों की जानकारी में मामला आया, जबकि हर वार्ड प्रभारी को उसके वार्ड में होने वाले हर कार्य की जानकारी रहती है, बावजूद इसके बेखौफ अवैध निर्माण जारी है।
कहां कितने निर्माण
शहर विधानसभा क्षेत्र
23 से 41 और 47 व 48 वार्ड है। कुल 21 वार्ड में करीब 200 निर्माण कार्य वर्तमान में चल रहे हैं। 21 वार्ड प्रभारियों ने अपने वार्ड से करीब 200 डीओ (अवज्ञा आदेश) जारी किए हैं। इनमें से 150 निर्माणाधीन भवन को नोटिस जारी हुए हैं।
सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र
42 से 46 और 49 से 64 वार्ड है। कुल 21 वार्ड के वार्ड प्रभारियों ने 300 डीओ जारी हुए हैं। इनमें से 50 को नोटिस जारी हुए है।
सूरसागर विधानसभा क्षेत्र
वार्ड 1 से 22 और 65 इस विधानसभा के अधीन आता है। कुल 23 वार्ड में 257 निर्माण कार्य वर्तमान में चल रहे है। 23 वार्ड प्रभारियों ने कुल 257 डीओ जारी किए हैं। इनमें से करीब 70 निर्माण कार्य बिना अनुमति व नक्शे से छेड़छाड़ कर अवैध तरीके से बनाए गए हैं।
हादसा होने व विरोध करने पर चेतता है निगम
अवैध निर्माण के कारण हादसा होने और क्षेत्रवासियों के विरोध करने पर निगम कार्रवाई के लिए चेतता है, जबकि पहले से ही निगम के पास हर एक निर्माण का लेखा जोखा होना चाहिए। अवैध निर्माण की शिकायतों पर भी सुनवाई नहीं होती।
नोटिस देने तक सीमित
निगम अवैध निर्माण के मात्र नोटिस जारी करने तक ही सीमित है। इधर, निगम नोटिस जारी करता है, उधर भूखंड मालिक कुछ दिन बाद फिर से निर्माण कार्य शुरू कर देता है। जारी नोटिस की पूर्ण रूप से मॉनिटरिंग नहीं होती। कई मामले तो वार्ड प्रभारी अपने स्तर पर ही सेट कर लेते हैं। ऐसे में अवैध निर्माण को शह मिल रही है।
Published on:
12 Jun 2018 12:22 pm
