
कस्बे से निकलती बारात। फोटो- पत्रिका
भोपालगढ़। कस्बे में साटिया समाज के दो दूल्हों की बारात अनोखे अंदाज में निकली। दोनों बारात में चार-चार हाथी और घोड़े शामिल थे। इसके अलावा ऊंट, सजी-धजी बग्गियां और लग्जरी वाहनों का लंबा काफिला भी आकर्षण का केंद्र बना। बस स्टैंड से गुजरती बारात को देखने के लिए ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग घरों की छतों और सड़कों पर खड़े होकर इस नजारे को कैमरे में कैद करते रहे।
जानकारी के अनुसार, साटिया समाज के बाबूलाल और लूणकी-खेताराम के बेटों की बारात निकलीं। दोनों दूल्हों को जयपुर से मंगवाए गए हाथियों पर बैठाया गया, जबकि अन्य परिजन ऊंटों, घोड़ों और नागौर से आई आकर्षक बग्गियों में सवार हुए। बारात के साथ दो-तीन दर्जन लग्जरी वाहन और कई डीजे की धुनों पर नाचते कलाकार भी शामिल थे। यह दृश्य पूरे कस्बे में आकर्षण और चर्चा का विषय बना रहा।
करीब आधा दर्जन डीजे लगाए गए और अजमेर व जोधपुर से विशेष नृत्य कलाकारों की टीम भी बुलाई गई। शाम के समय जब हाथी-घोड़ों से सजी ये बारात भोपालगढ़ कस्बे के बस स्टैंड और अन्य मार्गों से गुजरीं, तो लोग अपने कामकाज छोड़कर इस अनूठे नजारे को देखने लगे। साटिया परिवार से जुड़े किसनाराम ने बताया कि जोधपुर रोड निवासी लूणकी-खेताराम और बाबूलाल के बेटों की यह बारात आकर्षण का केंद्र बन गई।
भोपालगढ़ में साटिया समाज के अधिकांश परिवार पशु व्यापार से जुड़े हैं। वे ग्रामीण इलाकों से बछड़े, बछड़ियां और ऊंट खरीदकर आस-पास के मेलों में बेचते हैं। वहीं दोनों दूल्हे रामलाल और मुन्नाराम केवल साक्षर हैं, जबकि उनकी दुल्हनें आपस में बहनें हैं। इनमें से एक दुल्हन रेशमा केवल साक्षर है और दूसरी दुल्हन पूजा ग्रेजुएशन कर रही है।
Published on:
11 Nov 2025 06:52 pm
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