
सूरसागर सीट का जातिगत समीकरण पूर्व महापौर रामेश्वर दाधीच के उतरने से काफी रोचक हो सकता है। कांग्रेस के साथ भाजपा का खेमा भी चिंता में है। दाधीच वैसे तो कट्टर कांग्रेसी है, लेकिन भाजपा को डर है कि ब्राह्मण वोटों का ध्रुवीकरण हुआ तो नुकसान हो सकता है। पिछले कई चुनाव में भाजपा ब्राह्मण कार्ड और कांग्रेस अल्पंसख्यक कार्ड खेल रही है और कांग्रेस वहां 2008 के बाद से नहीं जीती है, लेकिन दाधीच के मैदान में उतरने से कई जातिगत समीकरण बदल जाएंगे।
पूर्व महापौर रामेश्वर दाधीच ने तो यहां तक कह दिया कि बिना रगड़ाई हुए कार्यकर्ता अगर विधानसभा जाते हैं तो इससे ज्यादा दुर्भाग्य की बात नहीं है। सूरसागर में उठे बगावत के बवाल को शांत करना कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गया है।
मारवाड़ में यहां भी बगावती तेवर
शिव : जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रविन्द्रसिंह भाटी ने कुछ दिन पहले ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और अब बागी होकर शिव विधानसभा से चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। यहां से भाटी टिकट की मांग रहे थे, लेकिन भाजपा ने स्वरूप सिंह खारा को प्रत्याशी बना दिया है।
सिवाना : सीएम के करीबी सुनील परिहार ने भी बगावती तेवर दिखा दिए हैं। वे यहां तीन साल से तैयारी कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस ने टिकट मानवेन्द्रसिंह जसोल को दे दिया। इसके बाद उन्हें जोनल इंचार्ज बनाकर डेमेज कंट्रोल के प्रयास भी किए गए। लेकिन वे निर्दलीय चुनावी मैदान में ताल ठोकने पर अड़े हुए हैं।
सुमेरपुर : यहां से पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता मदन राठौड़ ने निर्दलीय मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है। 2018 में राठौड़ का टिकट काट कर जोराराम कुमावत को मैदान में उतारा गया था। इस बार उन्होंने प्रबल दावेदारी की, लेकिन उनको मौका नहीं दिया। इससे नाराज होकर इन्होंने भाजपा से बगावत की है।
Published on:
06 Nov 2023 01:07 pm
