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सलमान खान हिरण शिकार केस में बोला बचाव पक्ष, अविश्वसनीय हैं चश्मदीद गवाह के सारे बयान

हिरण शिकार के मामले में निचली अदालत में जारी है सुनवाई  
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जोधपुर

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Nidhi Mishra

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Updated: 14 Nov 2017, 5:03 PM IST

hearing in Salman Khan black buck poaching case

hearing in Salman Khan black buck poaching case

अभिनेता सलमान खान एवं अन्य अभिनेता-अभिनेत्रियों के खिलाफ राजश्री प्रोडक्शन्स की फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान कथित रूप से हिरण शिकार करने का मुकदमा दर्ज हुए 19 वर्ष से अधिक हो गए। यह मामला बीसवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। मामले की अंतिम सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला अदालत में जारी है। पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा की अदालत में सोमवार को बचाव पक्ष ने अभियोजन के सबसे मजबूत और चश्मदीद गवाह पूनमचंद के सभी बयान झूठे करार देते हुए सलमान खान को बेकुसूर बताया।

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने बहस आगे बढ़ाते हुए कहा कि गवाह पूनमचंद विश्नोई ने कोर्ट में जिरह के दौरान इस बात से इनकार किया था कि उसने घटनास्थल पर काले हिरणों के शव के पास गोली, छर्रे या खोल देखे थे। उन्होंने कहा कि अभियोजन ने अपनी चार्जशीट में पूनमचंद द्वारा उप वन संरक्षक मांगीलाल सोनल को उनके घर पर रात को 9.15 बजे हरिण का शिकार करने की रिपोर्ट देने का जिक्र किया था। पूनमचंद ने जिरह में बताया था कि उसने दोपहर दो बजे रिपोर्ट दी थी। इस तरह से कई विरोधाभासी बयानों के कारण चश्मदीद गवाह पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

अविश्वसनीय गवाह के बयानों के आधार पर सलमान सहित किसी को भी सजा देना न्यायोचित नहीं होगा। सारस्वत ने एक अन्य गवाह शेराराम के बयान और मुख्य परीक्षण में विरोधाभास उजागर किया। शेराराम ने बयान दिया था कि उसने 1-2 अक्टूबर 1998 की मध्य रात्रि में गाडिय़ों और लोगों की आवाजें सुनी थीं, जबकि मुख्य परीक्षण में उसने गोलियों की आवाज सुनने का दावा किया था। उन्होंने कहा कि शेराराम का घर घटनास्थल से दो से तीन किलोमीटर दूर है, इतनी अधिक दूरी से किसी भी तरह की आवाज सुनना संदेहास्पद है।

रिपोर्ट और फर्द में एक ही तरह के कागजात

बहस के दौरान सारस्वत ने तर्क दिया कि वन विभाग के पास दर्ज शिकार की रिपोर्ट और उनके द्वारा तैयार की गई विभिन्न फर्दें एक ही तरह के कागज से बनाई गई हैं। इससे साबित होता है कि रिपोर्ट 2 अक्टूबर 1998 को नहीं लिखवाई गई, बाद में तैयार की गई। समय अभाव के कारण सोमवार को अंतिम बहस पूरी नहीं हो पाई। बहस मंगलवार को भी जारी रही।