
देर रात सड़क पर उतरे 10 गांवों के लोग (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Kanker Sand Mining Controversy: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के चारामा ब्लॉक में रेत खदानों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। देर रात कोरर चौक पर 10 से अधिक गांवों के ग्रामीण एकत्र हुए और सांसद-विधायक की कथित कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने खदानों को बंद कराने की कोशिशों का विरोध करते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर कई सवाल उठाए।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की रेत खदानों से बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। उनका दावा है कि खदानों से होने वाली आय का उपयोग गांवों के विकास कार्यों में किया जा रहा है। तालाब निर्माण, मंदिर और देवगुड़ी के विकास, बोरवेल खुदाई सहित कई जरूरी कार्य इसी राशि से कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खदानें बंद होने पर गांव की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी और कई लोगों की रोजी-रोटी छिन जाएगी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ जनप्रतिनिधि निजी स्वार्थों के कारण रेत खदानों को बंद करवाना चाहते हैं। उनका कहना है कि जानबूझकर इस मुद्दे को विवाद का रूप दिया जा रहा है, जबकि इन खदानों से कई परिवारों का जीवनयापन जुड़ा हुआ है।
मामले में विधायक सावित्री मंडावी ने कहा कि उनका विरोध रेत खदानों से नहीं, बल्कि अवैध तरीके से किए जा रहे खनन और भारी मशीनों के इस्तेमाल से है। उन्होंने बताया कि चैन माउंटेन मशीनों और भारी हाइवा वाहनों की वजह से क्षेत्र में लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। साथ ही पुल-पुलियों को नुकसान पहुंच रहा है और ग्रामीणों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। विधायक ने कहा कि स्थानीय लोगों को ट्रैक्टर के माध्यम से रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है।
चारामा क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद महानदी के कई घाटों में रात के अंधेरे में अवैध रेत उत्खनन का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। खनन माफिया बेखौफ होकर मशीनों के जरिए रेत निकाल रहे हैं और भारी वाहनों से परिवहन किया जा रहा है।
अवैध खनन की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें महानदी से रेत से भरे ट्रकों की आवाजाही साफ दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि माहुद रेत खदान से प्रतिदिन करीब 200 ट्रक रेत का परिवहन किया जा रहा है। इसके अलावा भिरौदा, तेलगुड़ा, हारडुला खरथा, किलेपार और भिरौद जैसे इलाकों में भी रात के समय अवैध खनन का कारोबार तेजी से संचालित हो रहा है।
पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। एक ओर ग्रामीण रोजगार और विकास के नाम पर खदानों के समर्थन में खड़े हैं, तो दूसरी ओर अवैध खनन, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
Updated on:
27 May 2026, 3:29 PM IST
Published on:
27 May 2026, 3:28 PM IST
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