
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कन्नौज. Kannauj Famous perfumes are in demand- बारिश की बूंदें जब कन्नौज की मिट्टी पर पड़ती हैं, तब यहां की मिट्टी से भी खास तरह की खुशबू निकलती है। और तो और... कन्नौज की हवाएं भी अपने साथ सुगंध लेकर चलती हैं। दुनियाभर में मशहूर कनौज के इत्र की बंद पड़ीं करीब 200 इकाइयों में एक बार फिर से खुशबू की बयार चल पड़ी है। जल्द ही यहां की इत्र से फिजाएं फिर महकेंगी। दुनिया के सबसे महंगे इत्र अदरऊद के आर्डर अब दुनियाभर से मिलने लगे हैं। जल्द ही इसका निर्यात शुरू हो जाएगा। अदरऊद के एक ग्राम इत्र की कीमत लगभग 5 हजार रुपए है। यहां के इत्र की सप्लाई यूके, यूएस, सउदी अरब, ओमान, इराक, इरान समेत कई देशों में की जाती है। कनौज के इत्र का इस्तेमाल कॉस्मेटिक के साथ गुटखा और पान मसाला बनाने में भी होता है। योगी आदित्यनाथ सरकार कोविड संकट थमने के बाद एक बार फिर यहां परप्यूम म्यूजियम और पार्क प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रही है।
इत्र नगरी कन्नौज में देश का सबसे खूबसूरत परफ्यूम पार्क और म्यूजियम बनाने की सिलसिले में यूपी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकारण (यूपीसीडा) ने एक वेबिनार का आयोजन किया। जिसमें देशभर की दिग्गज मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में बताया गया कि पिछले दो साल से कनौज के इत्र का कारोबार ठप पड़ा था। लेकिन अब जल्द ही फिर से यहां इकाइयों में काम शुरू हो जाएगा।
25 लाख तक कीमत
अदरऊद के अलावा शमामा भी अनूठा इत्र है। जो कई तरह की जड़ी-बूटियों, सुगंधित तेलों सहित 41 से अधिक प्राकृतिक अवयवों से बनता है। मिट्टी इत्र भी मशहूर है। एक तरह से यह बारिश की खुशबू को शीशी में कैद करने की कोशिश है। यहां सुगंधित तेलों की कीमत 25 रुपए में एक ग्राम की छोटी-सी शीशी से लेकर 20 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक है। अदरऊद तेल (असम के एक्विलेरिया पौधों से तैयार) की कीमत 25 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक है। रूह गुलाब (गुलाबी गुलाब से निर्मित) का एब्सोल्यूट ऑयल 8 लाख रुपए तक बिकता है।
खास है कन्नौज का इत्र
दुनिया का सबसे महंगा इत्र कन्नौज में बनता है। यहां के इत्र की लोग बेचैनी और तनाव से बचने के लिए भी खुशबू लेते हैं। कन्नौज का इत्र पूरी तरह से प्राकृतिक गुणों से भरपूर होता है। इसमें अल्कोहल का इस्तेमाल नहीं होता। इसलिए यहां के इत्र की दुनियाभर में डिमांड है।
फारस के कारीगरों से सीखा नुस्खा
कन्नौज में इत्र का इतिहास काफी पुराना है। यहां के लोगों को इत्र बनाने का तरीका और नुस्खा फारस के कारीगरों से मिला। बताया जाता है कि तब मलिका ए हुस्न नूरजहां के लिए गुलाब से एक विशेष प्रकार का इत्र बनता था। अलीगढ़ में उगाये दमश्क गुलाब का इत्र कन्नौज की फैक्ट्री में जब बनता है तो आसपास का माहौल महक उठता है। यहां का गेंदा, गुलाब और मेहंदी का इत्र भी विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
एक नजर
-कन्नौज में हाइड्रो-डिस्टिलेशन तकनीक से बनता है इत्र
-लगभग 200 छोटी, मध्यम और बड़ी डिस्टिलरीज हैं
-एल्कोहल की जगह सुगंधित तेल का होता है इस्तेमाल
-वुडस्की, फ्लोरल, मस्की और एंड्रोजेनस इत्र मशहूर
-फूलों और अन्य अवयवों से निकाले गए सुगंधित तेल से बनते हैं
-यहां के इत्र पानी और तेल में घुल जाते हैं
-मिंट, चमेली, चंदन, ट्यूबरोज और स्पाइसेज तेलों का होता है निर्यात
Published on:
03 Jul 2021 08:09 pm
बड़ी खबरें
View Allकन्नौज
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
