
सावधान! ! बच्चों के वायरस ने किया बड़ों पर ‘अटैक’
कानपुर। बारिश का सीजन खत्म होने को है, लेकिन नमी की वजह से बीमारियों ने सिर उठाना शुरू कर दिया है. वायरस और बैक्टीरिया की वजह से फीवर, डेंगू, मलेरिया के मामले तेजी से बढ़े हैं. वहीं हर साल की तरह इस बार भी वायरल इंफेक्शन में बदलाव आया है. आमतौर पर बच्चों पर प्रभाव डालने वाले सिनकाईशियल वायरस ने अब बड़ों पर प्रभाव डाला है. कारण है कि क्योंकि मौसम में नमी और प्रदूषण इसमें वायरस की मदद कर रहे हैं. इसके चलते बुखार के साथ रेस्पेरेटरी सिस्टम पर भी असर पड़ रहा है. खुद डॉक्टर्स भी इसे लेकर परेशान हैं, क्योंकि इसके इलाज में कोई सेट लाइन ऑफ ट्रीटमेंट नहीं है.
बड़ों को पहुंचा रहा है नुकसान
आमतौर पर रेस्पेरेटरी सिनकाईशियल वायरस का असर बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर होता है. जिसकी वजह से उन्हें सर्दी, जुखाम की प्रॉब्लम होती है. इसके बाद बच्चों को हाईग्रेड फीवर आता है. इसके बाद सीने में जकडऩ और तेज खांसी की शुरुआत होती है, लेकिन इस बार इसका असर काफी व्यापक है. यह युवाओं और महिलाओं को बीमार कर रहा है. वायरस के असर से पूरे शरीर में दर्द भी हो रहा है.
ऐसे होते हैं लक्षण
- सर्दी, जुखाम आना 3 से 4 दिन तक
- सेकेंड स्टेज - हाईग्रेड फीवर आना, खांसी की शुरुआत
- थर्ड स्टेज - छाती में प्रॉब्लम, सांस फूलना
- फाइनल स्टेज - निमोनिया होना या फिर लंग्स और जरूरी अंगों पर प्रभाव
ऐसा कहते हैं जानकार
इस बारे में मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता कहते हैं कि यह वायरस तेजी से फैल रहा है. इसमें मरीजों के इलाज के लिए कोई तय लाइन ऑफ ट्रीटमेंट नहीं है. ऐसे में हर मरीज का उसके लक्षणों के हिसाब से अलग अलग तरह से इलाज करना पड़ता है.
ऐसा कहती हैं एचओडी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के एचओडी व डायरेक्टर प्रो. रिचा गिरी कहती हैं कि वायरल इंफेक्शन मौसम के साथ तेजी से फैल रहा है. अलग अलग वायरस व बैक्टीरिया के असर पर माइक्रोबायोलॉजी व पैथोलॉजी विभाग की तरफ से भी अपडेट मिल रही है. लगातार ओपीडी में पेशेंट्स बढ़े हैं.
Published on:
14 Sep 2018, 1:50 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.