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महिला क्रिकेटर के पति ने दिया त्रिपल तलाक, पीएम मोदी से पीड़िता ने लगाई मदद की गुहार

क्रिकेट खेलने पर लगाई रोक, पांच के बाद सरकारी पद पर रहते हुए दूसरी शादी रचाई

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क्रिकेट खेलने पर लगाई रोक, पांच के बाद सरकारी पद पर रहते हुए दूसरी शादी रचाई

कानपुर। उसने महज सात साल की उम्र में हाथ में बैट थाम लिया और क्रिकेट प्लेयर बनने के लिए सुबह से लेकर शाम तक नेट में पसीना बहाती रही। परिजनों ने लड़की होने के चलते उसे क्रिकेट से दूर रहने की सलाह दी पर वह नहीं मानी और अपने दम पर यूपी की टीम में सिलेक्ट हो गई। इसी दौरान उसका इंडियन महिला क्रिकेट टीम में सिलेक्शन हो गया। कई मैच खेले और भारत की टीम को जीत दिलाई। इसी दौरान परिजनों ने उसकी शादी तय कर दी, उसने इंकार किया लेकिन पिता नहीं मानें और उसका निकाय शिक्षा विभाग में तैनात फरदीन खान से अक्टूबर 2011 में कर दिया। शादी के पति ने उसे क्रिकेट खेलने से रोक लगा दी और घर संभालने का हुक्म सुना दिया। चार साल तक वह पति का उत्पीड़न सहती रही। पांच के बाद फरदीन की मुलाकात एक अन्य महिला से हो गई और उसने पहली पत्नी को त्रिपल तलाक देकर दूसरी शादी रचा ली। पिछले दो सालों से हो न्याय की लिए मौलवियों से लेकर शासन-प्रशासन के चक्कर लगा रही है पर अभी तक न्याय नहीं मिला। पीड़िता ने पीएम मोदी को खत लिखकर पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने की मांग की है।
7 साल पहले की थी शादी
शहर के बेकमगंज इलाके में रहने वाली मुस्लिम महिला जो एक नेशनल क्रिकेटर के तौर पर भारत के लिए मैच खेल चुकी हैं। महिला ने बताया कि उनका निकाय 2011 में कानपुर के रहने वाले फरदीन खान से अक्टूबर 2011 में हुआ था। वह बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी करते हैं। पीड़िता के मुताबिक शादी के बाद पति ने शरियत का हवाला देकर मुझे क्रिकेट खेलने से रोक दिया और घर में रहने का हुक्म सुना दिया। पूर पांच साल तक पति मुझे प्रताड़ित करता रहा, बावजूद मैं उसकी ज्यादती सहती रही। 2016 में पति की मुलाकात एक अन्य महिला से हो गई और दोनों के बीच दोस्ती हो गई। पति उसे घर लेकर आने लगा तो मैंने इतराज जताया। जिसके कारण उसने मुझे कईबार पीटा और दिसंबर 2016 को पति शराब के नशे में आया और त्रिपत तलाक देकर घर से निकाल दिया।
प्रेमिका के साथ किया निकाह
पति ने बकाएदा कॉजी की मौजदूगी में दूसरी शादी कर ली। मैं उस वक्त पुलिस के पास गई, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के दर पर जाकर फरियाद लगाई पर उन्होंने आश्वासन देकर हमें वहां टरका दिया। पति ने पहले मेरे क्रिकेट खेलने पर रोक लगाई, फिर त्रिपल तलाक दे दिया। तलाक के बाद से मैं अपने माता-पिता के साथ रह रही हूं। पति ने मुझे गुजारा भत्ता भी नहीं दिया। कानपुर के कई मुस्लिम धर्म गुरू, कॉजी और मौलवी के पास जाकर अपनी ब्यथा सुनाई, पर किसी ने मदद नहीं की। पीएम मोदी ने जिस दिन त्रितल तलाक का कानून बनाया उस दिन मुझे लगा कि अब इंसाफ मिल जाएगा। लेकिन राज्यसभा में कानून पास नहीं होने के चलते मेरे हाथ हताशा ही लगी।
पीएम को बताया भाई, लिखा पत्र
पीड़िता ने पीएम नरेंद्र मोदी को अपना बड़ा भाई बता उन्हें पत्र लिखकर जालिम पति को सजा दिलाए जाने की मांग की है। पीड़िता ने बताया कि मैंने पीएम मोदी भाईजान को खत खिला है और उनसे जल्द से जल्द त्रिपल तलाक का कानून राज्यसभा में पास कराए जाने को कहा। पीड़िता के मुताबिक अब भाजपा का लोकसभा के साथ ही राज्यसभा में बहुमत है और मुस्लिम महिलाओं को त्रिपत तलाक रूपी रासक्ष से बचाने के लिए जल्द से जल्द इसे पास करा कर जमीन पर लागू कराएं। पीड़िता ने कहा कि पीएम मोदी ने 12 साल की बच्च्यिं के रेप के आरोपियों को फांसी कानून कैबिनेट के जरिए बनाकर लागू कर दिया। ऐसे ही वह त्रिपत तलाक पर अध्यादेश लाकर कानून बनाएं और त्रिपत तलाक देने वाले पतियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएं।
सरकारी नियमों का नहीं किया पालन
पीड़िता ने बताया कि सरकारी नौकरी करने वाले व्यक्ति दूसरी शादी नहीं कर सकता, बावजूद फरदीन ने नियम-कानून को ताक पर रख कर दूसरा निकाय कर लिया। हमने इसकी शिकायत 2016 में रहे शिक्षामंत्री, कानपुर डीएम, कानपुर कमिश्नर और सपा विधायकों के पास जाकर की, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। पति इस वक्त बिल्हौर तहसील के बीसीए कार्यालय में तैनात है। हम सीएम योगी आदित्यनाथ से मांग करती हैं कि बीसीए बिल्हौर को तलब कर पति के बारे में जानकारी कराएं और उन्हें सप्पेंड कर मुकदमा दर्ज कराए जाने का आदेश शिक्षा विभाग के अफसरों को दें। पीड़िता ने बताया कि योगी सरकार बनने के बाद मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक के शिकायत की थी और उन्होंने पति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए, पर अभी तक कुछ नहीं हुआ।