
कानपुर। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सचिव का 28 अप्रैल तक देश के सभी गांवों में बिजली पहुंच जाने का दावा किया था जो खोखला साबित हो रहा है। कानपुर नगर के साथ-साथ आसपास के दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी बिजली नहीं पहुंची। ऐसा ही एक गांव नगरवल तहसील का सिम्मरनपुर है। जिसकी आबादी करीब आठ सौ है। यहां सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है। बिजली नहीं आने के चलते गांव में कुवांरों की एक बड़ी फौज खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ , बिजली मंत्री श्रीकान्त शर्मा, स्थानीस सांसद देवेंद्र सिंह भोले और भाजपा विधायक अभिजीति सिंह सांगा के दर पर जाकर बदहाल गांव में रोशनी लाए जाने की फरियाद की थी, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। जिसके चलते ग्रामीणों ने अपने गांव का नाम बदल कर पीओके कर लिया।
सचिव के दावे की खुली पोल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी की देश के सभी गांवों में 28 अप्रैल 2018 तक बिजली पहुंचा दी गई है। साथ ही केंद्रीय बिजली मंत्रालय के सचिव अजय कुमार भल्ला ने दावा किया था कि 988 दिनों में ही विभाग ने देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कानपुर शहर के आसपास दर्जनों गांव हैं, जहां आज भी लोग चिमनी के सहारे रात्र गुजार रहे हैं तो बिजली नहीं आने के चलते कुवांरों की एक बड़ी फौज खड़ी हो गई है। ऐसा ही एक गांव कानपुर मुख्यालय से 25 किमी की दूरी पर स्थित सिम्मरनपुर है, जहां आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद बिजली नहीं पहुंची। गांव में एक भी टॉयलेटों का निर्माण नहीं हुआ, जिसके कारण कोई भी पिता अपनी बेटी का रिश्ता इस गांव में करने को तैयार नहीं। गांव में 100 से ज्यादा कुवांरे 50 साल की उम्र पार कर गए हैं।
उम्मीदों पर फिरा पानी
सर्वेश कहते हैं कि हमारी उम्र 40 साल की हो गई। मां को इंतजार है कब बहु आएगी और रोटी बनाकर खिलाएगी। नवरात्र आते रहे और जाते रहे पर हमारे घर को रिश्ता लेकर नहीं आया। सर्वेश ने बताया कि सर्वेश बताते हैं कि हमने सीएम को ट्यूट कर गांव की तस्वीर के साथ हकीकत की जानकारी दी, पर वहां से कोई रिसपान्स नहीं मिला। उद्योगमंत्री सतीश महाना, कपड़ा मंत्री सत्यदेव पचौरी, जेलमंत्री जयकुमार जैकी के साथ ही कानपुर के डीएम और सीडीओ को लिखित शिकायत कर विकास की मांग की पर किसी ने नहीं सुनी। सर्वेष के बगल में खड़े रामसजीवन यादव कहते हैं कि अभी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या छांजा गांव आए थे और चौपाल लगाई थी। हमलोग उनसे मिलने के लिए गए, पर सरकारी अफसरों ने मिलने से रेक दिया। बावजूद किसी तरह से हम उनके पास पहुंचे और बिजली के पोल लगवाने की मांग की। उन्होंने भी आश्वासन देकर टरका दिया।
विज्ञापन के बाद भी कोई नहीं आया
गांव के करण सिंह (75) ने बताया कि हमारे चार बेटे हैं। तीन की उम्र पचास के आसपास पहुंच गई है, वहीं चौथे नंबर का बेटा सोनू गणित से एमएससी पास कर नौकरी कर रहा है। नाते-रिश्तेदारों के साथ ही अखबार में शादी का विज्ञापन निकलवाया। पिछले नवरात्र को अमौली के सुरश यादव अपनी बेटी का रिश्ता लेकर आए, पर जैसे ही उन्होंने गांव की बदहाली देखकर उन्होंने बेटी की शादी करने से इंकार कर दिया। गांव में बिजली, पानी, शिक्षा, सड़क, साफ सफाई की व्यवस्था नहीं होने के चलते यहां कोई गरीब भी अपनी बेटी का विवाह करना नहीं चाहता। वहीं 65 साल की उम्र पार कर चुके राजाराम यादव जो गांव के बाहर मंदिर में घर बना लिया और बाबा का भेष रखकर अपनी बची जिंदगी काट रहे हैं।
इन गांवों में भी नहीं पहुंची बिजली
नर्वल तहसील के भीतरगांव विकास खंड के गांव रसूलपुर जाजमऊ पर ही नजर डाले, तो ग्राम सभा व राजस्व गांव होने के बावजूद इस गांव में आज तक बिजली नही पहुंची है। करीब डेढ़ हजार की आबादी वाले अनुसूचित व पिछड़े वर्ग की बहुलता वाले इस गांव के लोगों ने आज तक यहां बिजली नही देखी है। यही हाल इसी ग्राम सभा के मजरा खेरवा का भी है। ग्राम प्रधान संतराम यादव बताते हैं कि एक किमी दूर गांव अमौर व दो किमी पर स्थित सचौली में बिजली है। संतराम बताते हैं कि तहसील दिवस में डीएम व विधायक सब से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन आज तक हालात जस के तस हैं। यही हाल विकास खंड के गांव बिजानखेड़ा. हुलासपुर व पचनगढ़ की भी है, जहां आज तक बिजली नही पहुंची है। पतारा विकास खंड के राजस्व गांव शिरोमनपुर के ग्रामीण बीते कई वर्ष से विद्युतीकरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन आज तक उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ भी नसीब नही हुआ है।
क्या बोले जिम्मेदार
मुख्य अभियंता कानपुर क्षेत्र एके श्रीवास्तव ने बताया कि उनके क्षेत्र के तहत आने वाले जिलों के शत प्रतिशत गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। अभी तक गांव की अनुसूचित जाति की बस्तियों में विद्युतीकरण हुआ है। सौभाग्य योजना के तहत मार्च 2019 तक शत प्रतिशत घरों में बिजली पहुंचा दी जाएगी। दक्षिणाचंल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के घाटमपुर डिवीजन के तहत आने वाले गांवों में एससीबीएल व मेसर्स गुप्ता पावर कंपनी दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत विद्युतीकरण का काम कर रही हैं। लेकिन वह डिवीजन के अभियंताओं को रिपोर्ट नही करती हैं। जिसके चलते डिवीजन के अभियंता तक विद्युतीकरण को लेकर अपडेट नही रहते हैं। अब तक 90 फीसदी गांवों में विद्युतीकरण की संभावना जताते हुए अधिशासी अभियंता जेएन कौशल बताते हैं कि अपडेट आंकड़े उनके पास नही हैं। माह दिसंबर तक उनके डिवीजन के तहत आने वाले सब स्टेशनों से विद्युतीकृत 507 गांव व मजरे जुड़ चुके थे।
Published on:
09 May 2018 04:02 pm
