गन्ने की पेराई के बाद उसकी खोई बच जाती है। इसका निस्तारण चीनी मिलों के लिए बड़ी समस्या रहता है। दरअसल सीधे तौर पर इसका कोई उपयोग नहीं होता है। बाजार में बेचने पर एक से डेढ़ रुपये प्रति किलो ही कीमत मिलती है। खोई जलाने से प्रदूषण होता है। इसको देखते हुए एनएसआई के विशेषज्ञों ने किसानों और चीनी कारखानों को अतिरिक्त लाभ दिलाने के लिए अन्य सह उत्पाद विकसित किए हैं। यह बिस्किट फाइबर के रूप में तैयार किया गया है। संस्थान के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन के अनुसार बिस्किट बनाने के लिए बेकिंग पाउडर, क्रीम, फैट आदि शामिल किया गया हैं। इसमें कॉपर, विटामिन बी, सी और ई की मात्रा अधिक है। सेहत को ध्यान में रखते हुए चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया गया है।