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कानपुर में मायावती को लगा करारा झटका, नसीमुद्दीन के साथी ने पंजे का दामन थामा

सीसमऊ से लड़े थे 2017 का विधानसभा चुनाव, नसीमुद्दीन के करीबियों में थे वसीक
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कानपुर

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Vinod Nigam

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Updated: 25 Feb 2018, 3:13 PM IST

सीसमऊ से लड़े थे 2017 का विधानसभा चुनाव, नसीमुद्दीन के करीबियों में थे वसीक

कानपुर। लोकसभा चुनाव से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती की मुश्किलें हर दिन बढ़ती ही जा रही हैं। गुरूवार को जहां पूर्व मंत्री ननसीमुद्दीन सिद्दी और कानपुर से लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी सलीम अहमद ने कांग्रेस की सदस्यता दिल्ली में ली थी, वहीं शनिवार को सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हाजी मोहम्मद वसीक समर्थकों के साथ पंजे का दामन थाम लिया। मोहम्मद वसीक ने बताया कि मायावती हिटलर की तरह कार्य करती हैं। उन्होंने पार्टी को अपनी निजी प्रार्वटी बना रखी है और जमीनी नेताओं के बजाए चापलूसों के कहने पर निर्णय ले रही हैं। 2019 चुनाव में बसपा में सिर्फ गिनती के नेता व कार्यकर्ता बचेंगे। पूर्व मंत्री के साथ बसपा का बड़ा कैडर आज भी साथ खड़ा है और वह अब कांग्रेस को जिताने के लिए जुट गया है।
सीसामऊ से लड़ चुके हैं चुनाव
विधानसभा 2012 से लेकर 2017 निकाय चुनाव में बसपा को यूपी में करारी हार उठानी पड़ी। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने हार का ठीकरा पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन पर फोड़ते हुए पार्टी से निकाल दिया। इसी के बाद से बसपा के कई दिग्गज नेता दूसरे दलों में जाने के लिए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए। गुरूवार को पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दी और सलीम अहमद ने दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ली, वही शनिवार को कानपुर से बसपा को एक और झटका लगा। सीसामऊ विधानसभा चुनाव 2017 में बसपा से चुनाव लड़े मोहम्मद वसीक ने शनिवार को पंजे का दामन थाम लिया। इस दौरान उनके साथ सैकड़ों कार्यकर्ता बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। 2017 विधानसभा चुनाव के हार के बाद मोहम्मद वसीक ने पार्टी से दूरियां बना ली थी और नसीमुद्दीन की राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा में शामिल हो गए थे।
पार्टी को बना लिया अपनी प्रार्पटी
मोहम्मद वसीक ने बताया कि 2017 विधानसभा चुनाव की हार के बाद बसपा सुप्रीमो को नसीमुद्दीन ने भीतरघात करने वालों पर कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन उल्टा मायावती ने उन्हें ही दल से बाहर कर दिया। जिसके कारण मुस्लिम समाज के साथ बड़ी संख्या में दलित वोटर्स और पार्टी का कैडर पूर्व मंत्री के साथ खड़ा हो गया। अब हम पूर्व मंत्री के साथ मिलकर संप्रदायिक ताकतों के अलावा बसपा और सपा को हराने के लिए जमीन पर जुटेंगे। मोहम्मद वसीक ने बताया कि मायावती ने बसपा को अपनी निजी सम्पत्ति बना ली और टिकटों को बेचकर तिजोरी भरी। मायावती कांशीराम के मिशन से भटक गई और दौलत कमाने में लग गई।
सपा-बसपा गठबंधन को नहीं मिलेगा लाभ
मोहम्मद वसीक ने बताया कि जो हमलोगों को जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा ओा सपा के बीच गठबंधन हो सकता है, लेकिन जनता इनके मंसूबों को भलीभांति जानती है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी अगला चुनाव लड़ने जा रही है और हमें उम्मीद है कि जनता अब दिल्ली में पंजे की सरकार बनवाएगी। पौने चार साल के दौरान मोदी सरकार पूरी तरह से फेल रही है। कानपुर के सांसद मुरली मनोहर जोशी इन पौने चार सालों में गिनती के दि नही शहर में दिखे हैं। कानुपर का मुस्लिम और दलित कांग्रेस को वोट देगा और पार्टी शहर व देहात में जीत दर्ज करेगी।