31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पीएम मोदी के एक फैसले के बाद तब यह सुर्खियों में था, आज सिर्फ नाम का है खंजाची

तत्कालीन यूपी सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फेंस कर उसका नाम लिया था और उसके परिवार को आर्थिक मदद की घोषणा भी की थी।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

कानपुर

•

image

Shatrudhan Gupta

•

Updated: 6 Nov 2017, 5:10 PM IST

khajanchi

khajanchi

कानपुर. पिछले साल आठ नवंबर की आधी रात ठीक १२ बजे केंद्र सरकार ने 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की थी। इस नोटबंदी के दौरान पूरे देश में कइओं की जान गई तो कई पाई-पाई के लिए मोहताज हो गए। कैश न होने के कारण कई परिवारों ने अपने बेटियों की शादियों की तारीख आगे बढ़ा दी तो कई ने चंदा मांगकर अपनी लाडली का ब्याह रचाया। इसी दौरान देश में एक नाम काफी चर्चा में रहा। वह था 'खजांची'।

लोगों के जुबान पर था खजांची का नाम

दरअसल, पिछले साल नोटबंदी के दौरान कानपुर देहात निवासी गर्भवती सर्वेशा देवी नोट बदलने के लिए बैंक के बाहर कतार में लगी थी, तभी उन्हें प्रसव पीड़ा हुई और उन्होंने बैंक के बाहर ही एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम उसकी मां ने खजांची रखा। यह नाम कई दिनों तक पूरे देश में चर्चा में रही। आज भी यदि नोटबंदी की चर्चा यूपी में होती है तो 'खजांची' का नाम जरूर जुबान पर आ जाता है। यहां तक की तत्कालीन यूपी सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फेंस कर उसका नाम लिया था और उसके परिवार को आर्थिक मदद की घोषणा भी की थी। खजांची के परिवार को अखिलेश सरकार ने दो लाख रुपए की आर्थिक मदद की थी। इसके बाद भी 'खजांची' के परिवार की चर्चा काफी दिनों तक रही, लेकिन, आज इस परिवार को कोई पूछने वाला भी नहीं है। 'खजांचीÓ का परिवार पाई-पाई को मोहताज है। न कोई राजनीतिक दल उसकी मदद को आगे आ रहा है और न ही कोई सामाजिक संगठन। चूंकि, इस आठ नवंबर को नोटबंदी के पूरे एक साल हो जाएंगे। भाजपा इसे जहां कालाधन विरोधी दिवस के रूप में मनाएगी, वहीं विपक्षी पार्टिंयां इस दिन काला दिवस मनाएगी।

बैंक वालों ने नहीं की थी मदद, सास ने बैंक की सीढिय़ों पर कराया प्रसव

मालूम हो कि खजांची का परिवार कानपुर देहात के झींझक इलाके का रहने वाला है। पिछले साल 2 दिसंबर को नौ महीने की गर्भवती सर्वेशा देवी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के बाहर लगी कतार में रुपए निकालने के लिए काफी देर से खड़ी थीं। सर्वेशा देवी ने बताया, उसे बैंक की लाइन में खड़े हुए करीब पांच घंटे हो गए थे। उसने बैंक अधिकारियों से मदद मांगी, लेकिन उन्होंने मदद से साफ इनकार कर दिया। उसे वहीं प्रसव पीड़ा होने लगी। मैं हॉस्पिटल जाने की स्थिति में नहीं थी, इसलिए मेरी सास ने लोगों की मदद से बैंक की सीढिय़ों पर ही डिलीवरी करवाई। मुझे बेटा पैदा हुआ था। मुझे लगा कि मेरा बेटा नोटबंदी के दौरान और बैंक की सीढिय़ों पर हुआ है, इसलिए इसका नाम खजांची रखना चाहिए। हमने इसका नाम तभी खजांची रख दिया। इसके बाद ही सर्वेशा देवी का यह बेटा पूरे देश में खजांची नाम से प्रसिद्ध हो गया। उस दौरान वह अखबरों की सुर्खिंयों में रहा।

तत्कालीन यूपी सीएम अखिलेश यादव ने की थी मदद

पिछले साल नोटबंदी के दौरान जन्मा खजांची का नाम पूरे देश के लोगों की जुबान पर था। लेकिन, उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। स्थिति आज से भी खराब है। पूरा परिवार पाई-पाई को मोहताज है। खजांची आज गरीबी में पल-बढ़ रहा है। उसके परिवार को तत्कालीन सपा सरकार द्वारा दिए गए 2 लाख की आर्थिक सहायता खजांची के पढ़ाई-लिखाई पर खर्च होना था, लेकिन परिवार ने 75,000 रुपए दूसरे कामों में खर्च कर दिए। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में सर्वेशा देवी ने बताया कि खजांची की चार बड़े भाई-बहन हैं। उनकी शादी के लिए परिवार को रुपए चाहिए। खजांची की सबसे बड़ी बहन प्रीति 10 साल की है और तीन भाइयों में से एक भाई टीबी की बीमारी से पीडि़त है। उसका इलाज आगरा में चल रहा है।

खजांची के जन्म से छह माह पहले पिता की हो चुकी थी मृत्यु

सर्वेशा देवी ने बताया कि खजांची के पिता की उसके पैदा होने से करीब छह माह पहले ही टीबी की बीमारी से मौत हो चुकी थी। मैं बचपन से पोलियो ग्रस्त हूं, इसलिए जीवन यापन के लिए नौकरी नहीं कर सकती। बताते चलें कि खजांची का परिवार सपेरा जनजाति का ह। जिस बैंक के बाहर खजांची का जन्म हुआ था उस बैंक के मैनेजर सुनील कुमार चौधरी कहते हैं, ब्रांच में 400 से 500 लोग काम करते हैं। बैंक की सीढिय़ों पर बच्चे का जन्म होने पर अफरा-तफरी मच गई। उनकी स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी। बाद में बैंक अधिकारी उसके घर गए थे और उसे 5000 की एफडी, कपड़ों और खिलौनों के साथ दी थी।