सीतापुर के पच्चालाल ने हरदोई में तैनाती के दौरान वर्ष 2003 में पड़ोसन किरन से दूसरा ब्याह रचा लिया था। पहली बीवी को पैतृक गांव में रखने वाले पच्चालाल दूसरी बीवी यानी किरन की अदाओं और खूबसूरती पर फिदा थे, इसलिए उसे साथ ही रखते थे। किरन और पच्चालाल की उम्र में ज्यादा अंतर है। इसी कारण पच्चालाल पर बुढ़ापा सवार होने लगा तो किरन का दिल डोलने लगा। पच्चालाल का नौजवान मित्र महेंद्र यादव उर्फ जितेंद्र का घर आना-जाना था। महेंद्र यादव भी सरकारी नौकरी में है, यानी रोडवेज की बस चलाता है। पच्चालाल ने किरन को सरकारी बस अड्डे के निकट के मोहल्ले रेलबाजार में रखा था, जबकि खुद की तैनात शहर से 40 किलोमीटर दूर सजेती थाने में थी। इसी कारण पच्चालाल सप्ताह में दो दिन ही घर आते थे। उधर, महेंद्र अक्सर ही आता-जाता रहता था। मित्र की पत्नी को भाभी के संबोधन से पुकारने वाला महेंद्र अक्सर ही अश्लील मजाक भी करता रहता था। इन्हीं मजाक ने दोनों के बीच नई कहानी को शुरू कर दिया।