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ये पोर्टल जूनियर्स की फ्यूचर प्लानिंग में होगा मददगार

एचबीटीयू की इंटरनेशनल एल्युमिनाई मीट में सीनियर्स ने अपने जूनियर्स को बेहतरीन तोहफा दिया. जूनियर्स के अच्छे भविष्य के लिए सीनियर्स ने एक पोर्टल तैयार किया है. ये पोर्टल उनके फ्यूचर प्लान करने में मददगार साबित होगा.
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Kanpur

ये पोर्टल जूनियर्स की फ्यूचर प्लानिंग में होगा मददगार

कानपुर। एचबीटीयू की इंटरनेशनल एल्युमिनाई मीट में सीनियर्स ने अपने जूनियर्स को बेहतरीन तोहफा दिया. जूनियर्स के अच्छे भविष्य के लिए सीनियर्स ने एक पोर्टल तैयार किया है. ये पोर्टल उनके फ्यूचर प्लान करने में मददगार साबित होगा. यह जानकारी एसोसिएशन सेक्रेट्री बलराम उपाध्याय ने दी. सीनियर ने डिपार्टमेंट के हॉस्टल व लैब का जायजा लिया. इस दौरान कुछ डिपार्टमेंट में सीनियर का लेक्चर भी कराया गया.

ऐसे उपलब्ध होगा डाटा
एचबीटीयू की 14वीं इंटरनेशनल एल्युमिनाई मीट का उद्घाटन मुख्‍य अतिथि वीसी प्रो. एनबी सिंह ने दीप प्रज्‍वलन के साथ किया. यहां वीसी ने कहा कि करीब 15 हजार एल्युमिनाई विदेशों में रह रहे हैं. इनका डाटा उपलब्ध हो जाए तो बेहतर होगा. इस पर एसोसिएशन ने भरोसा दिया कि वर्ष 2021 में टेक्निकल यूनिवर्सिटी के सौ वर्ष का जश्‍न मनाएगी. उससे पहले इस बात की कोशिश की जाएगी कि ज्यादा से ज्यादा डाटा उपलब्ध करा दिया जाए. प्रोग्राम में प्रो. वीसी प्रो. करुणाकर सिंह, प्रो. आर पी सिंह, प्रो. ओंकार सिंह यादव, प्रो. रघुराज सिंह यादव, प्रो. कृष्णराज, प्रो. विवेक सिंह सचान मौजूद रहे.

ऐसा करते थे सीनियर
वर्ष 1994 बैच के पास आउट विवेक श्रीवास्तव ने इलेक्‍ट्रॉनिक्स बीटेक की डिग्री हासिल की थी. विवेक श्रीवास्तव इस वक्त स्वीडन की एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहे हैं. विवेक ने कहा कि वह टेक्निकल यूनिवर्सिटी में विकास नहीं दिख रहा है, जबकि समय के साथ बदलाव जरूरी है. रैगिंग के सवाल पर विवेक ने बताया कि उस वक्त सीनियर्स ‘हिमालय’ पर भेज देते थे. दरअसल यहां खिड़की पर बैठने को ही हिमालय कहा जाता था.

जागरूकता है जरूरी
भारत सरकार के सभी मंत्रालयों को साइबर सिक्योरिटी की सेवा दे रहे आशीष कुमार सक्सेना ने एचबीटीयू से वर्ष 1976 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग किया था. एयर फोर्स में जॉब के दौरान उन्हें वर्ष 2000 में यूएस में साइबर सिक्योरिटी की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, जहां पर पेंटागन समेत कई स्थानों पर ट्रेनिंग हासिल की. उन्होंने बताया कि दुनिया के किसी भी देश में ओटीपी या मोबाइल पर ट्रांजेक्शन होने की जानकारी नहीं दी जाती है. भारत दुनिया का पहला देश है, जहां पर मैसेज व ओटीपी का सिस्टम चल रहा है. साइबर सिक्योरिटी की फील्ड में अभी जागरुकता का अभाव है. जिसकी वजह से समस्या हो गई है. हमारी कोशिश यही होती है कि हमारे साइबर सिस्टम में कोई सेंधमारी न कर सके.