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डोलची होली ने भरा रोमांच

टोडाभीम. समीपवर्ती गांव पावटा में होली के तीसरे दिन दोज को खेली जाने वाली परंपरागत डोलची होली शुक्रवार को पूरे जोश के साथ खेली गई। करीब लगभग 50 हजार लोगों की मौजूदगी में हदीरा बाबा चौक पर होली खेली गई।
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टोडाभीम. पावटा में डोलची होली खेलते लोग।

टोडाभीम. समीपवर्ती गांव पावटा में होली के तीसरे दिन दोज को खेली जाने वाली परंपरागत डोलची होली शुक्रवार को पूरे जोश के साथ खेली गई। करीब लगभग 50 हजार लोगों की मौजूदगी में हदीरा बाबा चौक पर होली खेली गई। चमड़े की बनी कठोर डोलची के वार से चटाक की आवाज युवाओं को घायल करती रही, लेकिन युवा पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे थे। घंटों तक चली इस संघर्षमय होली को पंच-पटेलों ने अंगोछा लहराकर विराम दिया। इससे पहले पंच पटेलों ने बल्लू शहीद के स्मारक पर हवन यज्ञ के बाद होली की शुरुआत की। सैकड़ों ग्रामीण मैदान के चारों तरफ बने पानी के टैंकों को भरकर उसमें रंग डालते नजर आए। डोलची होली का शुभारंभ खेल मंत्री अशोक चांदना, वैर विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना, अजीतसिंह महवा द्वारा किया गया । करीब तीन घंटे तक होली खेली गई।
पावटा सहित दूरदराज से कई लोग होली देखने आए। महिलाएं लोकगीतों पर नृत्य कर रही थी। डोलची के लिए हदीरा मैदान में स्थाई तौर से बनाए जलकुंडों को लबालब भर दिया। इस दौरान पुलिस व्यवस्था माकूल रही।
यह है परम्परा
हजारों वर्ष पूर्व गुर्जर समाज के आत्म सम्मान के लिए युद्ध करने के दौरान अपनी गर्दन धड़ से अलग हो जाने के बाद भी दुश्मनों का संहार करने वाले बल्लू की याद में गुर्जर समाज आज भी डोलची होली मनाता आ रहा है। यह होली पूर्व में खून से बाद में दूध एवं अब चर्मक से बनी डोलची में पानी भरकर खेली जाती है। बुजुर्गों का मानना है, कि गांव में ढोलची होली नहीं खेलने पर पावटा के लोगों पर आपदा आती है। करीब सात सौ वर्षों से गुर्जर समाज इस परम्परा को निभा रहा है।