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गांवों में पानी मिला न बनी सड़क

करौली. स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के गांव जुंगीनपुरा में सुबह आठ बजे घर की बाखिर में आठ-दस पंच-पटेल चाय की चुस्कियों के साथ चर्चा कर रहे थे। इस बीच वहां पहुंचे पत्रिका संवाददाता ने उनसे गांव में बीते पांच वर्षों के विकास कार्यों की चर्चा की तो उनका जवाब था कि दर्शन सीधा-सच्चा है, लेकिन विकास के मामले में फिसड्डी रहा हैं।
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मोहनपुर गांव में रास्ते पर जमा कीचड़।


करौली. स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के गांव जुंगीनपुरा में सुबह आठ बजे घर की बाखिर में आठ-दस पंच-पटेल चाय की चुस्कियों के साथ चर्चा कर रहे थे। इस बीच वहां पहुंचे पत्रिका संवाददाता ने उनसे गांव में बीते पांच वर्षों के विकास कार्यों की चर्चा की तो उनका जवाब था कि दर्शन सीधा-सच्चा है, लेकिन विकास के मामले में फिसड्डी रहा हैं। वे बोले कि पांच वर्षों में गांव में विधायक ने कोई उल्लेखनीय सौगात नहीं दी। जबकि इस गांव ने कांग्रेस के विधायक दर्शन सिंह गुर्जर को ९२७ के कुल मतदान में से ९२५ (९९.७८ प्रतिशत) मत दिए। वैसे दर्शनसिंह के गृह इलाके के सभी गांवों में उनके पक्ष में मतदान का प्रतिशत ९९ प्रतिशत पास ही रहा।
पानी का संकट
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पानी की कोई योजना नहीं है। महिलाओं को हैण्डपम्पों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है। चुनाव में दर्शन सिंह ने पानी की समस्या के समाधान का वादा किया। चुनाव जीतने पर भी वो आश्वासन देते रहे लेकिन गांव में पानी संकट बरकरार है। महिलाओं को दिन भर पानी की मशक्कत करनी पड़ती है। गांव के सार्वजनिक रास्ते बदहाल हैं। उच्च प्राथमिक स्कूल से मंदिर वाले रास्ता पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। बारिश के समय इस रास्ते से निकल पाना दुश्वार होता है। ग्रामीणों ने नाराजगी जता कहा कि विधायक सरकार से नहीं तो अपने कोष से निर्माण करा ही सकते थे।
स्कूल के लिए आवंटित बजट का नहीं उपयोग
ग्रामीणों ने बताया कि विधायक कोष से गांव के उच्च प्राथमिक स्कूल में भवन निर्माण को पांच लाख रुपए स्वीकृत किए गए। इस राशि का भी उपयोग नहीं हुआ। इससे स्कूल में कक्षा-कक्षों का अभाव बना हुआ है। विद्यार्थियों को अभावों के बीच अध्ययन करना पड़ रहा है। कम्प्यूटर कक्ष के अलावा संस्था प्रधान व कर्मचारियों के लिए भी कक्ष नहीं है।

कुडग़ांव ञ्च पत्रिका. ग्राम पंचायत सायपुर के मोहनपुर गांव में पिछले विधानसभा चुनाव में ग्रामीणों ने भाजपा के पक्ष में मतदान करने में कसर नहीं रखी। स्थिति यह रही कि मोहनपुर गांव के बूथ संख्या ६५ पर कुल १००१ के मतदान में से ९४१ मत (९४ प्रतिशत) भाजपा प्रत्याशी रोहिणी को प्राप्त हुए। हालांकि वो तो चुनाव हार गईं लेकिन प्रदेश में उनकी सरकार बनी। बावजूद इसके गांव को विकास की कोई सौगात नहीं मिल पाई। करीब ढाई हजार की आबादी वाले गांव में वोटरों की संख्या 1400 के करीब है। जहां अधिकतर लोग भाजपा के पक्ष के रहे हैं। गांव के रास्तों में कीचड़, जलभराव की दशा को देख लगता नहीं कि ये वो गांव है जिसने सत्ताधारी दल को विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक मतदान किया था। ग्रामीणों की शिकायत है कि कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत कराने पर भी गांव की समस्याओं को अनदेखा ही किया गया।
मोहनपुर गांव को करौली-वजीरपुर सड़क मार्ग से करीब 20 वर्ष पहले जोड़ा था। तत्कालीन करौली विधायक हंसराम गुर्जर ने गांव में होकर सड़क बनवाई थी। उसके बाद इस सड़क पर न तो ग्राम पंचायत ने कोई कार्य कराया और न सार्वजनिक निर्माण विभाग ने। इस कारण सड़क अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
ग्रामीण बिजली समस्या के लिए गांव में जीएसएस खोलने की मांग अनेक बार जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों से कर चुके हैं। सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने गांव में जीएसएस खोलने की घोषणा भी की। प्रस्ताव भी कई बार भेजे। लेकिन जीएसएस खोलने की क्रियान्विति नहीं हो पाई है।
गांव में चिकित्सा के लिए एक होम्योपैथिक केन्द्र है। एलोपैथी के लिए सब सेंटर है। चिकित्सा के लिए ग्रामीणों को सायपुर या करौली जाना पड़ता है। विकास की चर्चा करने पर ग्रामीणों का दर्द झलक कर सामने आया। वे बोले कि विधानसभा में ही नहीं संसद के चुनाव में और उससे पहले के चुनावों में भी भाजपा को भरपूर वोट देते रहे हैं लेकिन गांव की समस्या और विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ३० वर्ष पहले मंत्री ललित किशोर चतुर्वेदी ने सड़क, पानी सहित अन्य काम कराए उसके बाद से इलाके में किसी ने सुध नहीं ली जबकि उनका इलाका भाजपा का गढ़ माना जाता है।