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कासगंज दंगे की सूचना राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, पुलिस को पांच दिन पहले ही दे दी थी

संकल्प संस्था के पदाधिकारी ने घटना से पांच दिन पहले ही कासगंज में दंगा होने की आशंका का ट्वीट राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, यूपी पुलिस को किया था।

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kasganj violence

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कासगंज। उत्तर प्रदेश के कासगंज में दंगा हो सकता है, यह सूचना पांच दिन पहले केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश पुलिस को दे दी गई थी। किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। परिणाम सबके सामने है। गणतंत्र दिवस पर तिरंगायात्रा के दौरान मारपीट हुई। फिर पथराव और फायरिंग हुई। युवा अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई। अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी है। राजनीतिक दल कासगंज हिंसा पर रोटियां सेंक रहे हैं। अगर पुलिस ने सूचना पर ध्यान दिया होता तो कासगंज को जलने से बचाया जा सकता था।

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संकल्प फाउंडेशन के पदाधिकारी ने किया था ट्वीट

कासगंज में गैर सरकारी संगठन संकल्प फाउंडेशन है। चंदन गुप्ता इसका सदस्य था। इसके माध्यम से रक्तदान, गरीबों को वस्त्र वितरण जैसे कार्यक्रम चलते रहते हैं। फायरिग में मारे गए चंदन गुप्ता के पिता सुशील कुमार गुप्ता बताते हैं कि चंदन ने सर्दी से बचाव के लिए गरीबों को कपड़े देने का कार्यक्रम बनाया था। ये कपड़े आज भी रखे हुए हैं। इसी संकल्प संस्था के एक जिम्मेदार सदस्य ने चामुंडा मंदिर के बाद हुए घटनाक्रम को ध्यान में ऱखते हुए भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश पुलिस को ट्वीट किया था। लिखा था कि इस मामले को देखें यह मामला हिन्दू मुस्लिम हो सकता है। दूसरी सूचना फेसबुक के माध्यम से दी। किसी ने ध्यान नहीं दिया। माना जा रहा है कि ट्वीट करने वाला आम आदमी है, इसलिए कोई ध्यान नहीं दिया गया।

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26 जनवरी को फिर पोस्ट

इसके बाद 26 जनवरी को फेसबुक पर लिखा- मैंने कासंगज में सांप्रदायिक दंगे की सूचना पहले ही दे दी थी। जिले के आईपीएस अफसरों को भी बताया। मेरी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि दंगा हो गया। इसके लिए जिला प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है। खास बात यह है कि इस पोस्ट को 51 लोगों ने शेयर किया। इसमें अधिसंख्य युवा और कासगंज से बाहर रहने वाले लोग हैं। इस कार्यकर्ता को पता था कि तिरंगा यात्रा कहां-कहां होकर जाएगी और इसे रोका जाएगा। इसी कारण उसने पुलिस को नेताओं को अग्रिम सूचना दी थी। इसके बाद भी गंभीरता से नहीं लिया गया। संकल्प संस्था ने सवाल उठाया है कि यह कैसा डिजिटल इंडिया है, जहां डिजिटल सूचनाओं का कोई महत्व ही नहीं है।

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