
हरियाली का अजब जुनून : 25 साल की कड़ी मेहनत से बुजुर्ग ने उजड़ी जमीन को बना दिया घना जंगल
कटनी/ जीवन के लिए ऑक्सीजन कितना जरूरी है इस बात को गांव के एक आदिवासी बाबा ने भली-भांति समझा और उजड़े वन को 25 साल की कड़ी मेहनत से हरे भरे घने जंगल में तब्दील कर दिया। मामलामध्य प्रदेश के कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील के खम्हरिया गांव अंतर्गत मर्दानगढ़ के बाबा रामनाथ कोल की है। 25 साल पहले गांव के समीप उजड़े हुए एक जंगल को संवारने में बाबा ने युवा अवस्था की अपनी पूरी जिंदगी लगा दी।
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देखते ही देखते घने जंगल में तब्दील हुआ उजाड़ क्षेत्र
राजस्व वन क्षेत्र के उजाड़ हो गए जंगल को संवारने का बीड़ा बाबा ने उठाया और उसे घने जंगल में बदलने के लिए जुट गए। जैसे-जैसे समय बीतता गया बाबा की मेहनत भी रंग लाने लगी और जिन टूट चुके ठूठों में कभी हरियाली की उम्मीद नहीं थी, वहां जीवन रूपी हरियाली की कोपलें फूट पड़ी। देखते ही देखते उजाड़ हो चुका जंगल घने वन में तब्दील हो गया।
बाबा पहला लक्ष्य था
पत्रिका से बातचीत में बाबा ने कहा कि, जब उन्होंने इस काम को शुरू किया था, तो उनकी सबसे पहली कोशिश ठूठों में हरियाली लाना थी। उम्मीद जरूर थी कि, उनकी मेहनत रंग लाएगी और कई सालों तक कुछ पेड़ों में हरियाली न आने के बाद भी बाबा ने कदम पीछे नहीं किया।
जंगल में ही घर बनाकर की पेड़ों की सेवा
धीरे-धीरे बाबा की मेहनत रंग लाई और जंगल जब घने वन में तब्दील हुआ तो मोटे तो रहे पेड़ों को लकड़ी तस्करों से बचाने की चुनौती आन पड़ी। इसके लिए बाबा ने जंगल में ज्यादा समय देना शुरू किया तो इसमें उनकी पत्नी रामवती ने भी पूरा साथ दिया। पत्नी को लगा कि, जंगल में ज्यादा समय देना पड़ेगा तो वहीं झोपड़ी बनाकर रहने लगे। बारी-बारी से बाबा उनकी पत्नी और दो बेटे जंगल की सुरक्षा करते रहे।
इस तरह पड़ा 'जंगल वाले बाबा' नाम
हरियाली के लिए इसी कड़ी मेहनत का परिणाम रहा कि 50 हेक्टेयर से ज्यादा वनक्षेत्र हरियाली से भरपूर है। जंगल को संवारने में लगे बाबा के अथक प्रयासों के बाद गांव को अब उन्हें जंगल वाले बाबा के नाम से जानते हैं। इस पर बाबा रामनाथ एक ही बात कहते हैं कि हरे पेड़ों को देखकर दिल खुश हो जाता है।
10 साल पहले का वाकया नहीं भूलते बाबा
बाबा रामनाथ बताते हैं कि, सागौन के कुछ पेड़ों को काटने के लिए करीब दस साल पहले एक रात में दो तस्कर पहुंचे, तो उन्हें रोकना जान खतरे में डालना साबित हुआ। बाबा ने दोनों तस्करों को रोका तो उन्होंने दो टूक कहा कि, या तो तुम रहोगे या हम। फिर भी बाबा ने हार नहीं मानी और दो टूक कहा कि, लकड़ी पर कुल्हाड़ी चली तो तुम्हारे ऊपर भी कुल्हाड़ी चलेगी। कुछ देर बाद दोनों तस्कर लौट गए और इस तरह सागौन के कई पेड़ अवैध रूप से कटने से बच गए। बाबा बताते हैं कि, 25 साल में 12 से ज्यादा बार जंगल काटने तस्कर धावा बोल चुके हैं।
सरपंच ने कही सराहना
बाबा की मेहनत पर गांव के सरपंच लक्ष्मी बाई कोल बतातीं हैं कि सारे पेड़ बाबा के बचाए हुए हैं। बाबा नहीं होते तो एक भी पेड़ नही बचता।
Published on:
19 Nov 2020 08:08 pm
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