कटनी. कटनी नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन ब्रिज के धंसक जाने के मामले में सोमवार को प्रदेश सरकार के निर्देश पर दिल्ली से आए एक्सपर्ट ने बारीकी से जांच की। इस दौरान सेतु निगम के जांच अधिकारी भी मौजूद रहे। सोमवार की शाम ब्रिज एक्सपर्ट डॉ. वीरेंद्र कुमार रैना पहुंचे। उन्होंने दो घंटे तक ब्रिज का घूमघूमकर निरीक्षण व परीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अव्यवस्था को देखकर जमकर अधिकारियों की क्लास ली। एक्सपर्ट ने सेतु निगम के इंजीनियों को कहा कि यह कैसा ब्रिज बना रहे थे। भूकंप आता, नदी में बाढ़ और तापमान बढ़ता या वाहनों का दबाव बढ़ता तो यह अपने आप ढह जाता। इतना ही नहीं एक्सपर्ट ने इंजीनियरों से कई सवाल किए, लेकिन एक भी अधिकारी जवाब नहीं दे पाए। कई निर्माण सामग्री के नाम पूछे लेकिन इंजीनियर नहीं बता पाए। सामग्री की सुरक्षा को लेकर भी बड़ी बेपरवाही पाई। एक्सपर्ट ने कहा कि कम से कम अंदर तो सामाग्री रखो। गुस्से में कहा कि पूरी सामग्री रिजेक्ट कर दें तो मान जाओगे। इसको तो और खुले में फेंक दो तो लोग शौच करें। बता दें कि डॉ. वीके रैना अमेरिका सहित अन्य देशों में बड़े-बड़े ब्रिजों की जांच करते हैं वे कुछ दिनों से भारत में काम देख रहे हैं।
लापरवाही के कारण धंसका पुल
जांच के दौरान एक्सपर्ट अधिकारियों की क्लास ले रहे थे। इस दौरान सभी को जमकर फटकारा। रैना ने कहा कि जब तुम लोगों को अनुभव नहीं था तो फिर इतना बड़ा ब्रिज क्यों बनाने चले थे। कोई जानकारी नहीं थी तो बड़े अधिकारियों से बार-बार समझना था। इस तरह से रुपयों की बर्बादी ठीक नहीं है। जैसे-जैसे निरीक्षण के दौरान एक्सपर्ट को खामियां मिल रहीं थीं वे आग बबूला हो रहे थे। इस दौरान सेतु निगम के निलंबित उपयंत्री राजेश खरे को जमकर फटकारा और कहा कि तुम किसी काम के नहीं हो। निलंबित कार्यपालन यंत्री दिनेश कौरव, एसडीओ योगेश वत्सल को भी फटकार लगाई।
यह है मामला
24 जुलाई को कटनी नदी पर 4 करोड़ से अधिक का निर्माणाधीन एक हिस्से का पुल तेज धमाके के बाद धंसक गया। इससे हड़कंप की स्थिति बन गई थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने तत्काल सेतु निगम के चार अधिकारियों को निलंबित कर जांच बैठाई। 27 जुलाई को मुख्य अभियंता भोपाल एआर सिंह के नेतृत्व में जांच हुई। जांच रिपोर्ट आना बाकी है। बता दें कि नदी में 2008 से पुल निर्माणाधीन है और अबतक एक हिस्से का भी काम पूरा नहीं हुआ था और बड़ा हादसा हो गया।
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एक माह में टीम देगी रिपोर्ट
जांच टीम डॉ. वीरेंद्र कुमार रैना नायडा ब्रिज एक्सपर्ट कंसलटेंट की अध्यक्षता में आई थी। इसमें मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्राद्योगिक संस्थान विशेषज्ञ, एएस चेंडके तकनीकी सलाहकार मप्र सड़क विकास निगम बतौर सदस्य, एमपी सिंह प्रभारी अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण विभाग सदस्य सचिव के रूप में शामिल रहे। लोक निर्माण विभाग मंत्रालय भोपाल के निर्देश पर आठ बिंदुओं की जांच रिपोर्ट एक माह में सौपेंगे। ब्रिज क्यों क्षतिग्रस्त हुआ, कार्य त्रुटिपूर्ण था क्या, क्या प्रेसट्रेसिंग का कार्य क्रांकीट कास्टिंग की निर्धारित तिथि के पूर्व हुआ, मापदंडों का पालन हुआ कि नहीं, क्षति के लिए ठेकेदार या अधिकारी जिम्मेदार हैं, कितनी हानि हुई, 10 मार्च 2016 को मुख्य अभियंता सेतु निगम द्वारा ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया गया था तब प्रमुख अभियंता द्वारा जिन शर्तों के आधार पर 28 मार्च 17 को बहाल किया तो उसका पालन हुआ कि नहीं। इन सभी बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट बनेगी।
खास-खास:
– निरीक्षण के दौरान एमपीआरडीसी के जांच अधिकारी एएस चेंडके मीडिया से किया किनारा, कहां जांच अभी जारी है।
– अधिकारियों से चर्चा के दौरान ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला वर्जन न लेने बनाते रहे दबाव।
– दो दिन तक और दल करेगा जांच, ब्रिज सहित कांक्रीट प्लांट का करेंगे निरीक्षण, तैयार करेंगे रिपोर्ट।
– ठेकेदार और सेतु निगम के अधिकारियों की लापरवाही से करोड़ों रुपये बर्बाद हुए और शहर की शहर की जनता परेशान।
इनका कहना है
ब्रिज निर्माण में लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है। मैं तो सिर्फ इसको देखने आया था। जांच अधिकारी यह बताने में सक्षम हैं कि क्या गड़बड़ी है। हम अभी बारीकी से इसकी जांच करेंगे।
डॉ. वीके रैना, ब्रिज कंसलटेंट व जांच टीम के अध्यक्ष।