
Dirty water supply
बालमीक पांडेय @ कटनी. इंदौर महानगर में दूषित पेयजल की सप्लाई ने कई बेगुनाह जिंदगियों को निगल लिया है, सैकड़ों लोग जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इंदौर जैसा नजारा भले ही कटनी शहर का न हो, लेकिन शहरवासियों के घरों में अमृत के नाम पर पहुंचने वाला जल शुद्ध नहीं हैं। शहर के 45 वार्डों में 23 हजार घरों में पहुंचने वालो 24.50 एमएलडी पानी में कहीं न कहीं खामी है! इसकी मुख्य वजह यह है कि 25 साल पुरानी लगभग 75 किलोमीटर की पाइप लाइन में 15 से 20 किलोमीटर की लाइन ऐसी है जो गंदे नालों, नालियों से होकर लोगों के घरों तक जा रहा है।
शुक्रवार को पत्रिका द्वारा की गई पड़ताल में हकीकत सामने यह आई कि अधिकांश वार्डों की लाइन क्षतिग्रस्त है, लीकेज की भारी समस्या है। गटर और गंदे नालों से पानी पाइपों में भर जाता है, जिससे लोगों के घरों तक दूषित जल की कुछ समय तक सप्लाई होती है। कई वार्डों में मटमैला व नाले के पानी आने की समस्या आम बात हो गई है। जगह, पन्नी व रबर बांधकर काम चलाया जा रहा है। लाइन को बदलने 2023 से योजना बनी है, लेकिन प्रोजेक्ट आज भी अधर में है। वहीं गुणवत्ता जांच सवालों में हैं। टीडीएस मान भी कई वार्डों का सही नहीं है।
नगर निगम द्वारा विभाग की अरबन चैलेंज फंड योजना में भी एक प्रस्ताव 23.57 करोड़ रुपए का बनाया गया है। इस योजना में पुरानी पेयजल सप्लाई की पाइप लाइन, पुराने नल कनेक्शनों के स्थान पर नए नल को स्थापित कर सप्लाई देने के साथ 13 किलोमीटर की नई लाइन डालने की योजना बनाई गई है। यह प्रस्ताव विभाग के पास भेजा गया है। मुहर लगते ही टेंडर आदि की प्रक्रिया होगी।
2023 में नगर निगम के द्वारा शहर की 25 साल पुरानी पेयजल सप्लाई वाली लाइन बदलने का प्रस्ताव बनाया गया। यह प्रस्ताव विभाग में अधर में रहा। कुछ माह पहले 53.19 करोड़ रुपए के योजना की स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर कराया गया है। इसमें शहर के 45 वार्डों में 74 किलोमीटर की पुरानी व गंभीर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को बदला जाना है, जो नाले व नालियों से होकर, पुरानी बसाहट में हैं, इसमें से कई किलोमीटर की लाइन ऐसी है जो खतरों से भरी है, हां हमेशा शुरुआती दौर में गंदा पानी आता है। इस योजना के तहत आरिव एसोसिएट्स को का दिया गया है। अगस्त माह में अनुबंध हो चुका है, लेकिन अभी काम शुरू नहीं हुआ। इसकी मुख्य वजह ड्राइंग डिजाइन फाइनल न होना है। इस योजना में 12 किलोमीटर की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बदली जानी है, 35 किलोमीटर की मेन पाइप लाइन डलनी है, 7 ओवरहेड टैंकों का निर्माण होना है। ये टंकियां पहरुआ स्कूल, शिवाजी वार्ड के मुक्तिधाम में, रोशन नगर में आंगनवाड़ी के पास, मंगलनगर पार्क और सिविल लाइन टंकी के साथ पुलिस लाइन झिंझरी के पास टंकियों का निर्माण होना है। हालांकि 2 साल में नगर निगम ने 5 किलोमीटर की लाइन बदली है, जिससे कुछ उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
नगर निगम का दावा है कि शहर में 2045 तक अनुमानित आबादी 3.50 लाख को अनुपात में रखते हुए योजना बनाई गई है। यदि समय रहते अमृत-2 और अरबन चैलेंज फंड योजना पर काम होगा तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। बता दें कि अरबन चैलेंज फंड प्रस्ताव 31 नवंबर को अपर आयुक्त के आदेश के अनुसार बनाकर भेजा गया है।
विश्राम बाबा वार्ड क्रमांक-44 की पार्षद राजकुमारी मिथलेश जैन ने बताया कि हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित पानी की टंकी से जिन क्षेत्रों में जल सप्लाई की जा रही है, वहां अत्यधिक गंदा एवं कीटाणुयुक्त पानी आ रहा है। लारेंस लाइन, पंजाब किराना के पीछे का क्षेत्र, हाऊसिंग बोर्ड कार्यालय के पीछे स्थित कॉलोनी सहित आसपास के इलाकों के रहवासी पूरी तरह नगर निगम की जल सप्लाई पर निर्भर हैं। ऐसे में दूषित पानी पीने से लोगों के बीमार होने की गंभीर आशंका बनी हुई है। समस्या कई दिनों से लगातार बनी हुई है और नगर निगम को इसकी जानकारी होने के बावजूद अब तक सुधार के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पार्षद ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हाल ही में इंदौर में गंदा पानी पीने से अनेक लोगों की मृत्यु की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसके बावजूद नगर निगम कटनी इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है। इस मामले में निगमायुक्त तपस्या परिहार ने जांच के आदेश दिए हैं।
यह नजारा सागर पुलिया के आगे मुख्य मार्ग के किनारे लगे हैंडपंप का है। यह हैंडपंप नाले के बीच में है। इस पंप से क्षेत्र के दर्जनों परिवार पानी का उपयोग कर रहे हैं, जिसका सोर्स गंदा नाला है। इस पर नगर निगम, पीएचई व प्रशासनिक अधिकारियों को सुरक्षित व बंद कराकर अन्य स्थल पर इंतजाम कराने सुध नहीं है।
यह तस्वीर गुरुनानक वार्ड में कुए के पास की है, जहां पर नाले के अंदर से पाइन लाइन आई है, इसके अलावा आसपास के क्षेत्र में नलों के कनेक्शन भी इन्हीं नाले व नालियों से होकर लोगों के घरों तक पहुंचे हैं। कई जगह पर लीकेज की समस्या है। हर दिन यहां पर शुरुआत में 10 से 15 मिनट गंदा पानी आता है। दो साल से लोग ननि में शिकायत कर रहे हैं, लेकिन आजतक सुधार नहीं हुआ।
यह दृश्य शहर के उपनगरीय क्षेत्र माधवनगर का है, जहां पर लोगों के घरों के लिए गए पेयजल सप्लाई के पाइप लाइन कनेक्शन नाले के अंदर से आये हैं। माधनगर क्षेत्र में जल प्लावन व नालों के जाम होने की समस्या आम बात है, बावजूद इसके सप्लाई को सुरक्षित करने कोई पहल नहीं हो रही।
यह तस्वीर शहर के घंटाघर क्षेत्र की है, यहां पर भी बस्ती में लोगों के घरों में हुए नल कनेक्शन नालों व नालियों के अंदर से होकर जा रहे हैं, जिसके चलते लोगों को हमेशा समस्या होता है। पानी में दुर्गंध आती है।
यह तस्वीर शहर के वंशरूप वार्ड स्थित दाहिया मार्ग की है। यहां पर अधिकांश पेयजल सपलाई नाली के बीच से हो रहा है, जिनमें दिनभर गटर का पानी बहता है। कईबार लीकेज के कारण वार्ड में गंदा व दुर्गंधयुक्त पानी आता है। यहां पर लगे हैंडपंप के पानी में बदबू आती है और बड़े मुश्किल से पानी आती है। लोगों को कई माह से समस्या है, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा।
शहर में 2017 से सीवर लाइन का काम चल रहा है। जयंती सुपर कंपनी द्वारा दो साल से लाइन डालने का काम किया जा रहा है। आयेदिन पेयजल सप्लाई की पाइप लाइन को क्षतिग्रस्त कर रही है, जिससे लोगों के घरों में मटमैला, दुर्गंधयुक्त पानी पहुंच रहा है। हर दिन 4 से 5 शिकायतें नगर निगम के पास पहुंच रही हैं। सुधार के बाद दो से तीन दिन में सप्लाई साफ हो पाती है, जबतक क्षेत्र के लोग खराब पानी का उपयोग करने विवश होते हैं।
वंशरूप वार्ड निवासी दिनेश शर्मा ने बताया कि कटायेघाट से आने वाले पानी की सप्लाई में कहीं लीकेज है। हैंडपंप में भी गंदा पानी आ रहा है। लोगों के घरों की लाइन नालों से निकलने के कारण लीकेज होने पर गंदा पानी आती है, जो बीमारी का कारण बनता है। शीघ्र सुधार कार्य होना चाहिए।
लीकेज व खराब पानी की शिकायत मिलने पर तत्काल सुधार कार्य कराया जाता है। सीवर लाइन के काम से भी लाइनें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। शहर में 25 साल पुरानी लाइन है, जो खराब हो गई हैं। 75 किलोमीटर लाइन बदलने के लिए 53.19 करोड़ की योजना को स्वीकृति मिल गई है, शीघ्र ही काम शुरू होगी।
Published on:
03 Jan 2026 07:17 am
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