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Patrika Mahila Suraksha: महिलाओं पर अत्याचार बढ़े, चुप्पी तोड़ना जरुरी

Patrika Mahila Suraksha: महिलाओं में जागरुकता बेहद जरुरी है। साथ ही आत्मरक्षा के हुनर आने चाहिए। क्योंकि महिलाओं को खुद की सुरक्षा के लिए खुद ही कदम उठाने होंगे। साल दर साल समाज शिक्षित तो हो रहा है लेकिन महिलाओं के साथ अत्याचार कम नहीं हो रहे।

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Patrika Mahila Suraksha: कबीरधाम जिले में अपराध बढ़ते क्रम पर है। महिलाएं कतई सुरक्षित नहीं हैं। महिलाएं, युवती और बालिकाओं के साथ छेड़छाड़ से लेकर बलात्कार व हत्या जैसे जघन्य अपराध भी बढ़ते ही जा रहे हैं। इसे लेकर चुप्पी तोड़कर आवाज उठाने की आवश्यकता है।

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इसके लिए महिलाओं में जागरुकता बेहद जरुरी है। साथ ही आत्मरक्षा के हुनर आने चाहिए। क्योंकि महिलाओं को खुद की सुरक्षा के लिए खुद ही कदम उठाने होंगे। साल दर साल समाज शिक्षित तो हो रहा है लेकिन महिलाओं के साथ अत्याचार कम नहीं हो रहे। इसका अंदाजा इससे ही लगा सकते हैं कि आज भी दहेज के लिए महिलाएं प्रताड़ित होती हैं। थानों में रिपोर्ट दर्ज होती है कि ससुराल में पति और उनके रिश्तेदारों द्वारा महिलाओं से मारपीट किया। पत्नी, बहू को ससुराल में घर से निकाल दिया गया। इसके साथ ही महिलाओं के साथ उनके कार्यस्थल पर भी अत्याचार हो रहे हैं। आए दिन छेड़छाड़ हो रहे हैं और महिलाएं चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन चुप्पी तोड़नी होगी, तभी सुधार संभव है।

देश में महिलाओं के अधिकार के लिए कड़े कानून हैं। यह कानून अपराध के बाद काम आते हैं लेकिन सवाल सुरक्षा का है, इसे लेकर क्या होना चाहिए। क्योंकि महिलाओं पर अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं।

बालिकाओं के साथ अधिक अपराध घट रहे

पांच वर्ष की रिपोर्ट डरावने आकड़े…

आत्मरक्षा बेहद जरुरी

तमाम शहर व नगर में छेड़छाड़ ऐसा मुद्दा है जो हम सभी के बीच हर दिन घटित होता है, लेकिन हम अक्सर इसे नजरअंदाज करते हैं। आर्थिक अपराध, साइबर ठग, महिला उत्पीड़न, बाल-अपराध, चोरी, हत्या हर क्षेत्र में क्राइम ग्राफ बढ़ रहा है। अपराधों की बढ़ोतरी का मुय कारण बचाव के तरीकों की जागरूकता में कमी भी है। पुलिस-प्रशासन अपना काम कर रहे हैं। इसमें जागरुक समाज की सहभागिता आवश्यक है। प्रत्येक बालिका, युवती और महिला को आत्मरक्षा के लिए किसी न किसी प्रकार से प्रशिक्षण लेना चाहिए। प्रत्येक निजी और शासकीय स्कूल में छात्राओं को जूडो, कराते जैसे आत्मरक्षा के गुर सिखाने चाहिए। इससे खुद के बचाव के साथ दूसरों की मदद भी की जा सकेगी। लेकिन इस पर शासन, प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता। केवल औपचारिकता निभाते हुए कुछ दिनों का कराते प्रशिक्षण करा दिया जाता है। क्योंकि कुछ दिनों के प्रशिक्षण में बालिकाएं एक्सपर्ट हो जाएंगी। इसके लिए लगातार प्रशिक्षण की जरुरत है।

बीते पांच वर्ष में महिलाओं के साथ अत्यधिक अत्याचार हुए। बलात्कार, शीलभंग, छेड़छाड़, पति और उनके रिश्तेदारों द्वारा प्रताड़ना सहित अन्य कुल 764 मामले दर्ज किए गए। 282 बालिका, युवती और महिलाओं के साथ बलात्कार के वारदात हुए। मामलों में आरोपी गिरतार किए गए और जेल भेजा गया। इसके अलावा 309 शीलभंग और 32 यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ के मामले दर्ज किए गए। 132 प्रताड़ना और 6 दहेज मृत्यु के प्रकरण दर्ज किए गए।

सेमीनार में देते हैं जानकारी

कुछ वर्षों से यह भी देखने को मिल रहा है कि जिले में कम उम्र की बालिकाओं के साथ अपराध बढ़ रहे हैं। शीलभंग, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और बलात्कार के मामले की संया में बालिकाओं के साथ अधिक हो रहे हैं। इसे लेकर समाज, शिक्षा विभाग, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन को बालिकाओं में जागरुकता के लिए अधिक कोशिश करने की आवश्यकता है।

कवर्धा एसडीओपी कृष्ण कुमार चंद्राकर ने कहा जिला पुलिस की ओर बालिका और युवतियों को पास्को एक्ट सहित गुड टच बैड टच की जानकारी देेने के लिए स्कूल और कॉलेज में सेमीनार आयोजित करते हैं। अभिव्यक्ति एप है। इससे आपातकालीन सुरक्षा चाहिए तो इसके लिए आप्शन दिए गए हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी जाती है। इसके अलावा सभी थानों में महिला सेल व महिला हेल्प डेस्क है। जहां पर महिलाएं अपनी बात रख सकती है। अपनी शिकायत बता सकती हैं।

एक नजर.. वर्षवार रिपोर्ट पर

दहेज नहीं तो हत्या..

विवरण वर्ष 2024 2023 2022

बलात्कार 37 63 51

शीलभंग 49 40 71

छेड़छाड़/यौन उत्पीड़न 4 4 9

प्रताड़ना 36 17 35

दहेज मृत्यु 2 3 1

कबीरधाम जिले में बीते वर्ष 2024 में ही महिलाओं के साथ बड़ी वारदातें हुई, जिसमें जिसमें 246 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें दो प्रकरण दहेज मृत्यु के थे। मतलब ससुराल पक्ष को मनचाहा दहेज नहीं मिला तो बहु को प्रताड़ित कर मौत घाट उतार दिया। वैसे तो दहेज के कई दर्जन प्रकरण सामने आते हैं लेकिन अधिकतर मामलों में समझौता कर टाल दिया जाता है। कई प्रकरण तो समाज और लोक लाज के डर से घर में ही समाप्त कर दिए जाते हैं। जबकि इसके बाद भी महिलाओं पर अत्याचार जारी रहता है।

बीते कुछ वर्षों की बात करें तो हजारों महिलाओं के साथ विभिन्न प्रकार की यातनाएं हुई, लेकिन थानों तक बात सैकड़ाें तक पहुंचती है। दूसरा पहलू यह भी है कि महिलाओं के साथ अत्याचार तो पहले भी होते थे, लेकिन जागरुकता की कमी थी। महिलाएं अपना ही अधिकार नहीं जानती थी, लेकिन अब जागरुकता थोड़ी बढ़ी है। पांच वर्ष के दौरान महिलाओं के साथ ससुराल में पति और उनके रिश्तेदार द्वारा प्रताड़ना के लिए 135 मामले दर्ज किए गए, जिन पर कार्रवाई हुए।

नई पहल हो

कदम-कदम पर घूरती गंदी निगाहें…

पीड़िता के पास पहुंचे पुलिस

महिला अधिवक्ता सविता अवस्थी ने बताया कि महिलाओं के साथ कोई अपराध होता है तो उसको इसकी रिपोर्ट लिखाने थाने के चक्कर मारना पड़ता है। बड़ी मुशकिल से रिपोर्ट दर्ज किया जाता है। अगर कोई अपराध पीड़िता इस संबंध में सूचना देती है तो पीड़िता को थाने न बुलाकर पुलिस खुद पीड़िता तक पहुंच उस घटना के संबंध में जानकारी लेकर रिपोर्ट दर्ज करे। यह एक अच्छी पहल हो सकती है। बहुत सी पीड़िता थाने जाने के डर में अपराध का रिपोर्ट दर्ज नहीं कराती है। जितने भी ऑफिस, संस्थान हैं जहां पर महिलाएं कार्य करती हैं वहां महिला डेस्क की व्यवस्था होनी चाहिए। उसमें महिला पुलिसकर्मी महिलाओं के कार्यालयीन समय तक उपस्थित रहे। समय-समय पर उनके चेबर तक पहुंच कर गतिविधियों पर नजर रखे। समय-समय महिलाओं के लिए बने कानून उनके अधिकार के संबंध शिविर के माध्यम से उनको जानकारी दे।