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घुमंतू बच्चे मुख्य धारा से कोसों दूर, जिम्मेदार खामोश

नगर में देवारपारा के सिवाए ऐसे कई बच्चे हैं जो कबाड़ी का धन्धा करते हैं। यहां तक कि वे नशे के लिए भीख तक मांगते हैं। रोज सुबह कबाड़ी दुकानों के आसपास छोटे बच्चे कबाड़ी सामाग्री पकड़े दिखाई देते हैं।

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silent responsible

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कवर्धा. जिला मुख्यालय में एक दर्जन से अधिक बच्चे रोज कबाड़ी बीनते या भीख मांगते दिखाई देंगे। इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे वाली चाईल्ड लाइन द्वारा भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नगर में देवारपारा के सिवाए ऐसे कई बच्चे हैं जो कबाड़ी का धन्धा करते हैं। यहां तक कि वे नशे के लिए भीख तक मांगते हैं। रोज सुबह कबाड़ी दुकानों के आसपास छोटे बच्चे कबाड़ी सामाग्री पकड़े दिखाई देते हैं। बच्चों को इस माहौल से निकालने व रोकथाम के लिए केंद्र सरकार द्वारा चाईल्ड लाईन खोला गया है, लेकिन शहर में इनका कामकाज दिखाई नहीं दे रहा है। बच्चों के माता-पिता से चर्चाकर बच्चों को कबाड़ी व भीख मांगने के काम से दूरकर इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। लेकिन इन योजनाओं का भी लाभ शहर के घुमंतू बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। इन बच्चों पर चाईल्ड लाइन का ध्यान नहीं है। कई बार चाईल्ड लाइन की टीम द्वारा कार्रवाई कर केस बनाया जाता है।

समिति के पास 37 मामले पहुंचे
ऐसा भी नहीं है कि चाइल्ड लाइन द्वारा बिलकुल ही काम नहीं किया जाता। काम किया गया है, लेकिन जिला मुख्यालय की अनदेखी कर दी गई। इस वर्ष अप्रैल से सितंबर तक चाइल्ड लाइन के पास 37 मामले पहुंचे, जिसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए। ये आकड़े केवल भिक्षा वृति के हैं। जबकि इनको मुख्यधारा से जोडऩे कोई बड़ा प्रयास नहीं किया जा रहा है।

अवैध कामों से जुड़ रहे नन्ने मासूम
महिला बाल विकास विभाग द्वारा इस केस पर अधिक ध्यान नहीं देती। मतलब विभागीय कार्रवाई ढुलमुल तरीके से चली रही है। नगर में आधा दर्जन से अधिक कबाड़ी दुकान हैं, जहां छोटे बच्चे भी अपना शौक पूरा करने के लिए कबाड़ी का धन्धा करते हैं।

नशे के लिए मांगते हैं भीख
नगर के भीख मांगने वाले या कबाड़ी बेचने वाले अधिकतर बच्चे नशे के लिए करते हैं। गुटखा व बड़ी, सिगरेट व अन्य नशा के लिए कबाड़ी या भीख मांगते हैं इसी तरह के कार्य के लिए चाईल्ड लाइन की टीम है, लेकिन इसके कर्ताधर्ता लापरवाही बरत रहे हैं।