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खुलासे का इंतजार: जेल के अंदर चप्पल में छिपाकर कौन लाया था मोबाइल?

पुलिस दो महीने बाद भी नहीं लगा सकी सुराग, सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में भी लेट लतीफी

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Who had brought the mobile hidden in the slippers inside the jail?

Who had brought the mobile hidden in the slippers inside the jail?

खंडवा. सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में भी पुलिस का सुस्त रवैया सामने आया है। मामला जेल में मोबाइल फोन का है। चप्पल में छिपाकर जेल के अंदर मोबाइल फोन लाने वाले कौन हैं, इसका सुराग दो महीने बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी है। जबकि खंडवा जेल का सिमी कनेक्शन भी रह चुका है और सुरक्षा के लिहाज से यह जिला संवेदनशील माना जाता है। इसके बावजूद इस मसले पर जिम्मेदारों की गंभीरता सभी के सामने है। जेल प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने पुलिस को मोबाइल फोन और सिम कार्ड जांच के लिए दे दिया है, ताकि उन लोगों तक पहुुंचा जा सके जिन्होंने जेल की सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास किया।
जेल प्रबंधन भी निश्चिंत
जेल में चेतन पिता सीताराम नाम के व्यक्ति की पर्ची चप्पलों के साथ मिली थी। चप्पल में मोबाइल फोन होने का पता प्रहरी शिवांगी चौरे ने लगाया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जो लोग चिन्हित किए गए थे, उनसे पूछताछ की गई। मुलाकात रजिस्टर से उन व्यक्तियों के नाम भी निकाले गए जो जेल में बंदियों से मिलने आए थे। जेल प्रबंधन ने अपनी जांच अंदर ही अंदर खत्म कर ली और बाकी सब पुलिस पर छोड़ दिया।
मिनटों के काम में महीनों की देरी
जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी का कहना है कि उन्होंने एसपी को पत्र लिखते हुए मोबाइल फोन, सिम कार्ड और मामले से जुड़ी अहम जानकारी भेजी है। लेकिन दो महीने बाद भी जेल प्रबंधन ने पुलिस से यह जानने का प्रयास नहीं किया कि फोन और सिमकार्ड किसके नाम पर था। मोबाइल फोन कहां से खरीदा गया था। सिमकार्ड पहले भी उपयोग किया गया था या फिर नया कार्ड भेजा गया था। दूसरी ओर मिनटों में फोन का डेटा पता कर लेने वाली पुलिस दो महीने में भी मोबाइल फोन और सिमकार्ड के मालिक को नहीं तलाश पाई।
एफआइआर तक नहीं कराई
एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जेल प्रबंधन ने आखिर एफआइआर क्यों नहीं कराई थी? पुलिस के एक जिम्मेदार अधिकारी का तर्क है कि जेल प्रबंधन ने इस मामले की जांच में क्या किया? जबकि जेल में सीसीटीवी कैमरे हर जगह लगे हैं, तो फोन लाने वाले को क्यों नहीं देखा जा सका। फोन मिलने पर एफआइआर क्यों नहीं कराई। पुलिस का तर्क अपनी जगह है, लेकिन मामला जेल की सुरक्षा से जुड़ा है इसलिए बात गंभीर है।
वर्जन...
जेल में मोबाइल फोन आने पर हमने पुलिस को कार्रवाई के लिए दे दिया है। आगे की कार्रवाई के बारे में पुलिस ने कोई सूचना नहीं दी है।
- अदिति चतुर्वेदी, जेल अधीक्षक, खंडवा
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कॉल डिटेल के लिए साइबर सेल को पत्र लिखा है। जेल में पहुंचे मोबाइल फोन का मामला जांच में है।
- पूनम चंद्र यादव, सीएसपी, खंडवा