
CG News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर परीक्षण किया जाता है। बच्चों में होने वाली विभिन्न बीमारियों का पता लगाया जाता है। कोशिश होती है कि बीमारी को ठीक कर बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार किया जाए।
इस साल स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहली अप्रैल से लेकर अक्टूबर तक जिले के अलग-अलग विकासखंडों में स्थित सरकारी विद्यालयों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंप आयोजित किया गया है। इसमें बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई है। यह जानने का प्रयास किया गया है कि बच्चे स्वस्थ हैं या उनमें कोई बीमारी है। विभाग की ओर से की गई जांच में कई बीमारियों को पता चला है। पाया गया है कि कोरबा जिले के अलग-अलग विद्यालयाें में पढ़ने वाले 754 बच्चे चर्मरोग की समस्या से जूझ रहे हैं।
इसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र के बच्चे हैं। विभाग का कहना है कि इनमें से अधिकांश बच्चों का इलाज स्थानीय स्तर पर किया गया है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल भी रेफर किया गया है। अभी 17 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। चर्मरोग के साथ-साथ अलग-अलग विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में अन्य बीमारियों भी मिली हैं जिसमें त्वचा के साथ-साथ कानों में होने वाली संक्रमण भी शामिल है। इस बीमारी की भी विभाग की ओर से पहचान की गई है इसे दूर करने का प्रयास जारी है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया है कि स्कूलों में जांच के दौरान डॉक्टरों की अलग-अलग टीमें शामिल थीं। सामान्यत: बच्चों में होने वाली सभी प्रकार की बीमारियों की जांच स्कूलों में की गई है और इसके निराकरण का प्रयास किया गया है। इसी कड़ी में 145 विद्यार्थियों में आंख की दृष्टि कमजोर मिली है। ऐसे विद्यार्थियों को डॉक्टरों की टीम ने जरूरी सलाह दी है और उनके खानपान में सुधार लाने के लिए माता-पिता को कहा है।
साथ ही ऐसे बच्चों को प्रशासन की ओर से चश्मा भी उपलब्ध कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया है कि जिन बच्चों में आंख की रोशनी कम मिली है उन बच्चों की निगरानी अभी भी समय-समय पर की जा रही है और विभाग की टीम संबंधित स्कूलों के संपर्क में है।
औद्योगिक नगरी कोरबा में प्रदूषण की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। कोयले की राख के साथ-साथ खदानों से उड़ने वाला कोल डस्ट लोगों की परेशानी का कारण बना हुआ है। इसके अलावा थर्मल प्लांटों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ भी नदी-नालों को प्रदूषित कर रहे हैं। इससे हवा के साथ-साथ जल प्रदूषण भी बढ़ रहा है। दूषित पानी में नहाने से लोगों में चर्म रोग की समस्या बढ़ रही है।
कोरबा जिले में चर्म रोग एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। इस बीमारी से न सिर्फ विद्यार्थी परेशान हैं बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी चर्म रोग परेशान कर रही है। काउंसलिंग के दौरान अक्सर डॉक्टरों को यह पता चलता है कि गंदे पानी में स्नान के बाद मरीज चपेट में आए हैं।
विद्यार्थी चर्म रोग की समस्या से जूझ रहे हैं। इसमें खुजली, चमडी और हथेली में होने वाली दाद आदि शामिल है। इसका खुलासा समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूलों में की जाने वाली परीक्षण में हुआ है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिन विद्यार्थियों में चर्म रोग पाया गया है उनका इलाज किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर उन्हें हायर सेंटर भी रेफर किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया है कि अभी तक कोरबा जिले के 2188 स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया है। इसमें हाईस्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी तक शामिल है। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का भी स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है।
Published on:
03 Dec 2024 02:08 pm
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