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इस ठग का एक और खुलासा, दोनों बेटों के साथ मिलकर शिक्षक और उसके रिश्तेदार से की 38 लाख की ठगी

ठगी के आरोप में शंकर लाल रजक उसके पुत्र रवि और अजय रजक के अलावा सिद्धार्थ महंत के खिलाफ बांकीमोंगरा थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
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कोरबा

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Shiv Singh

•

Updated: 6 Jul 2018, 9:08 PM IST

इस ठग का एक और खुलासा, दोनों बेटों के साथ मिलकर शिक्षक और उसके रिश्तेदार से की 38 लाख की ठगी

इस ठग का एक और खुलासा, दोनों बेटों के साथ मिलकर शिक्षक और उसके रिश्तेदार से की 38 लाख की ठगी

कोरबा. शातिर ठग शंकर लाल रजक का एक और घोटाला उजागर हुआ है। इस बार उसने दोनों पुत्रों के साथ मिलकर एक शिक्षक और उसके रिश्तेदार से ३८ लाख रुपए की ठगी की है। पुलिस ने बताया कि ठगी के आरोप में शंकर लाल रजक उसके पुत्र रवि और अजय रजक के अलावा सिद्धार्थ महंत के खिलाफ बांकीमोंगरा थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। ठगी का यह मामला भी जमीन खरीद कर नौकरी लगाने से जुड़ा हुआ है।

रिपोर्ट घुड़देवा स्कूल के शिक्षक मार्टिन खलखो की शिकायत पर दर्ज की गई है। इसमें बताया गया है कि मार्टिन के जीजा टीएफ किंडो ने अपने पुत्र कबीर की नौकरी के लिए छुरीकला में एक जमीन खरीदी थी। इसे प्रशासन ने वंदना पॉवर प्लांट के लिए अधिग्रहीत कर ली थी। किंडो पर शंकर लाल पर भरोसा हो गया था।

टीएफ किंडो एसईसीएल से सेवानिवृत्त होने के बाद घुड़देवा कॉलोनी में रहते हैं। किंडो ने शंकरलाल के बारे में बताया तो मार्टिन झांसे में आ गए। उन्हें लगा कि शंकर लाल उनके लिए भी ऐसी जमीन खरीद सकता है, जहां कारखाना लगने की संभावना हो। किंडो ने शंकर लाल को मार्टिन का मोबाइल नंबर दिया। उनसे शंकर को बात करने के लिए कहा। दोनों के बीच मोबाइल पर बातचीत हुई।

वर्ष २०१३ में शंकर लाल अपने पुत्र रवि रजक व अजय रजक और दर्री निवासी सिद्धार्थ मंहत के साथ शिक्षक मार्टिन के घर पहुंचा। मार्टिन को बताया कि सरायपाली बुड़बुड़ में एसईसीएल नयी कोयला खदान खोलने जा रही है। यहां जमीन खरीदने पर मार्टिन के पुत्र को नौकरी और जमीन का अधिक मुआवजा मिल सकता है। मार्टिन ने जमीन खरीदी के लिए हामी भर दी। अपने बड़े भाई फीलमोन खलखो और साढू इग्नाशिव टोप्पो को अपने घर घुडदेवा में बुलाया। शंकर लाल के बारे में जानकारी दी। मार्टिन, उसके भाई और साढू तीनों सरायपाली बुड़बुड़ में जमीन खरीदी के लिए तैयार हो गए।

घर में दिखाया फर्जी दस्तावेज
इसके कुछ दिन बाद शंकर लाल रजक अपने दोनों बेटों और सिद्धार्थ के साथ मार्टिन के घर पहुंचा। उसके साथ संतलाल और अमर सिंह नाम के दो युवक भी आए थे। शंकर लाल ने दोनों का परिचय कराते हुए मार्टिन को बताया कि ये बुड़बुड़ के निवासी हैं। अपनी जमीन बेचना चाहते हैं। शंकर ने मार्टिन को एक पांचसाला रिकार्ड, जमीन का नक्शा और खसरा नंबर भी दिखाया। मार्टिन को भरोसा हो गया। तब शंकरलाल और उसके पुत्र ने जमीन रजिस्ट्री के लिए पैसे जुगाड़ करने के लिए कहा।

मार्टिन ने अपनी पत्नी क्रेशिया के बैंक खाते से १८ लाख छह हजार रुपए निकालकर शंकरलाल को दिया। इसके आठ दिन बाद शंकर लाल दोबारा मार्टिन के घर गया। उसके साथ एक अन्य व्यक्ति भी था। शंकर ने व्यक्ति का परिचय पाली के पटवारी के रूप में कराया। मार्टिन को यकीन हो गया। उसने अपने भाई और साढू की जमीन के लिए भी दो किस्तों में १५ लाख तीन हजार और पांच लाख ४३ हजार रुपए दिया। पैसा लेकर शंकर ने मार्टिन को बुड़बुड़ में जमीन खरीदी का पेपर दिया। बताया कि रजिस्टार के दफ्तार में जाने की जरूरत नहीं है। सभी काम करा देगा। दंपति ने शंकर से मिले राजस्व अभिलेख, ऋण पुस्तिका बी-१ सहित अन्य रिकार्ड को अपने पास रख लिया।

ठगी की खबर छपने पर पहुंचे जमीन खोजने
दंपति ने श्ंाकर लाल द्वारा दिए गए पेपर को सही मानकर घर में रख लिया। तीन साल गुजर गए। लेकिन शंकर ने जमीन की रजिस्टी का पेपर मार्टिन को नहीं दिया। इस बीच शंकरलाल रजक की ठगी की जब अखबार की सुर्खियां बनने लगी तो मार्टिन जमीन तलाशने सरायपाली बुड़बुड़ पहुंचा। उसे कोई जमीन नहीं मिली। जमीन बेचने वालों के बारे में पतासाजी कि तो मालूम हुआ कि उस नाम का कोई व्यक्ति रहता ही नहीं है। मार्टिन ने घटना की शिकायत बांकीमोंगरा थाने में की थी। पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर तलाश कर रही है।