
CG Dhan Kharidi: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य पूरा हो गया है। इस साल किसानों से लगभग 670 करोड़ रुपए का धान खरीदा गया है। किसानों ने प्रदेश सरकार को 29 लाख 15 हजार 548 क्विंटल धान बेचा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में किसानों से धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हुई थी। 31 जनवरी तक समर्थन मूल्य पर धान खरीदा गया। इस अवधि में किसान बड़ी संख्या में धान की बोरियां लेकर बेचने के लिए केन्द्रों तक पहुंचे।
CG Dhan Kharidi: सहकारी समितियों की ओर से धान की जांच की गई और इन्हें खरीदा गया। इन्हें खरीदकर अलग-अलग बोरियों में रखा गया लेकिन समय पर उठाव शुरू नहीं हो सका और अभी जिले के अलग-अलग केंद्रों में धान की बोरियां पड़ी हुई है। इस बीच धान खरीदी ने पिछले साल के रिकार्ड को तोड़ दिया है। पिछले साल लगभग 28 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी।
इस बार पैदावार अधिक होने से किसान बड़ी संख्या में धान की बोरियां लेकर खरीदी केन्द्रों तक पहुंचे। अलग-अलग केन्द्रों में धान खरीदी की निर्धारित तिथि तक 29 लाख 15 हजार 548 क्विंटल धान की खरीदी हुई। जिला प्रशासन की ओर से बताया गया है कि धान खरीदी के बदले किसानों को 670 करोड़ 57 लाख 62 हजार रुपए का भुगतान किया गया है।
समर्थन मूल्य पर प्रशासन की ओर से जितना धान खरीदा गया है उसका लगभग 17.75 फीसदी हिस्सा खरीदी केन्द्रों में पड़ा हुआ है। इसे उठाने के लिए विपणन विभाग की ओर से मिलर्स को डीओ जारी किया गया है लेकिन उठाने की शर्त कठिन होने के कारण मिलर्स समय पर कोरबा जिले के धान खरीदी केंद्रों से बोरियों का उठाव नहीं कर पा रहे हैं।
जिले के 65 उपार्जन केंद्रों पर 5 लाख 16 हजार 135 क्विंटल धान पड़ा हुआ है। हालांकि विपणन विभाग का कहना है कि मिलर्स को धान उठाने के लिए दबाव डाला जा रहा है और जल्द ही जिले से धान की बोरियों का उठाव कर लिया जाएगा। अलग-अलग केन्द्रों पर सबसे अधिक मोटा धान जाम है। इस साल किसानों ने समर्थन मूल्य पर मोटा और सरना धान ही बेचा है।
इस साल पहली बार ऐसा हुआ है जब किसानों ने प्रदेश सरकार को एक दाना भी पतला धान नहीं बेचा है। बताया जाता है कि प्रदेश मोटा धान का उपज अधिक होने के कारण किसानों ने सबसे अधिक इसकी बोआई की थी। कुछ क्षेत्रों में किसानों ने अपनी घरेलू जरूरतों को पूरी करने के लिए पतला धान उठाया है लेकिन कीमत कम होने के कारण पतला धान सरकार को नहीं बेचा है। किसान अब पतला धान की मिलिंग कराकर अपने घर में इस्तेमाल करेंगे। जरूरत से ज्यादा पतला धान बाजार में बेच देंगे। बरपाली और हरदीबाजार क्षेत्र में पतला धान की बोआई होती है।
केन्द्र शेष धान (क्विं. में)
उतरदा 11411
बोइदा 10340
कटघोरा 5618
कनकी 8332
करतला 13445
केरवाद्वारी 19960
कुल्हरिया 12752
कोथारी 7283
कुदमुरा 1860
कोरकोमा 7019
चचिया 4302
कोरबी पाली 14398
कोरबी पोड़ी 14901
चिकनीपाली 12514
लबेद 7407
छुरीकला 6923
सुमेधा 1339
जटगा 12101
तुमान जटगा 2450
जवाली 3444
रंजना 642
तिलकेजा 5376
नवापारा 21226
इस साल प्रदेश सरकार को समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 54 हजार 121 किसानों ने पंजीयन कराया था। लेकिन 44 हजार 427 किसानों ने ही धान की बिक्री की है। 9694 किसान धान बेचने के लिए नहीं पहुंचे। इसके पीछे क्या कारण है यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन चर्चा है कि इन किसानों के पास धान नहीं था। इस कारण से इन्होंने ऐसा कदम उठाया।
वहीं प्रशासन का कहना है कि धान खरीदी को लेकर शुरू से सतर्कता बरती जा रही है। उन किसानों से ही धान खरीदा गया जिन्होंने अपने खेत में धान का उत्पादन किया था। जिन्होंने धान की बोआई नहीं की थी उन पर नजर थी और वे बिचौलियों का धान सोसायटी में नहीं खपा सके। किसानों ने लगभग 56 हजार 157 हेक्टेयर में लगाए गए धान की फसल को सरकार बेचा है।
Updated on:
02 Feb 2025 01:15 pm
Published on:
02 Feb 2025 01:12 pm
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