उस दौर में हसदेव नदी पर बने लोहे के रेलवे ब्रिज से न सिर्फ मालगाड़ियां गुजरती थीं, बल्कि आम लोग भी इसे रास्ते के रूप में इस्तेमाल करते थे। पैदल आने-जाने के साथ-साथ छोटे वाहन भी लोग इस ब्रिज से निकाल लेते थे। खासकर मां सर्वमंगला मंदिर तक पहुंचने के लिए अधिकांश लोग इसी ब्रिज का सहारा लेते थे।