
IAS Ranendra
बैकुंठपुर. नवीन कन्या महाविद्यालय हिन्दी विभाग बैकुंठपुर के तत्वावधान में आयोजित 'लेखक से मिलिए' कार्यक्रम में चर्चित किताबों के लेखक व 2006 बैच के आइएएस राणेंद्र कुमार ने कहा कि अगर हमारे समाज में मोटरसाइकिल-कार, फ्रिज, कूलर, टीवी खूब बिक रहे हैं और किताबें नहीं बिक रहीं हैं तो हम बीमार समाज बना रहे हैं।
जो पढ़ा लिखा और शिक्षित कहलाता है, मगर दृष्टिकोण विकसित नहीं है। जनतंत्र के सवाल पर लेखक ने कहा कि जब तक हमारे घर में जनतंत्र नहीं आएगा, तब तक देश, समाज में सही मायनों में जनतंत्र नहीं आ सकेगा। क्योंकि आज भी घर से लेकर देश, समाज में हमें कोई एक मुखिया ही संचालित करता है और हम जी हा-जी हां ही करते हैं।
नवीन कन्या महाविद्यालय में लेखक से मिलिए कार्यक्रम में 'ग्लोबल गांव के देवता' और 'गायब होता देश' जैसी चर्चित किताबों के लेखक राणेन्द्र ने कहा कि यह विडंबना है कि हमें तकनीक से बेहतरीन चाहिए मगर हम अंधविश्वास से मुक्त नहीं हो पाते हैं। हम हाइटेक्निक वाहन से चलते हैं, मगर बिल्ली रास्ता काट दे तो रुक जाते हैं।
यह भी विडंबना है कि हमारे आसपास में अच्छी किताबों की दुकान नहीं है। इसका आशय यह है कि हमें किताबों की जरूरत नहीं है। जब हम पढ़ेंगे नहीं तो हमारा दृष्टिकोण कैसे विकसित होगा।
फिर पढऩे का ऐसा भी आलम है कि बच्चे क्या पढ़ें, क्या बनें। यह उनके अभिभावक तय करते हैं, बच्चों में कोई जिज्ञासा नहीं। हमारे पूर्वजों ने वेद, कुरान, बाइबिल में सब कुछ लिख दिया है। अब हमें पढऩे की जरूरत ही नहीं है।
इस दौरान एसडीएम,दशरथ सिंह राजपूत, डॉ विश्वासी एक्का, कवि नेसार नाज, डॉ दीपक सिंह, मृत्युंजय सोनी अनामिका चक्रवर्ती, कुसुम लता, डॉ रंजना नीलिमा, डॉ मनीषा सक्सेना, दीपशिखा मिश्रा, निकिता दुबे, नायमा बेगम, देवेंद्र मिश्रा, महेंद्र कुर्रे, सत्येंद्र लकड़ा, हिंदी विभागध्यक्ष डॉ कामिनी त्रिपाठी सहित महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित थीं।
'आप अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते है'
खडग़वां एसडीएम राजपूत ने पूछा कि आप प्रशासनिक अधिकारी होने के बाद भी प्रशासन की क्रूरता पर कैसे लिख सके। लेखक राणेंद्र ने जवाब दिया कि जब आप अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते हैं। तभी आप कमजोर पड़ते हैं। जब आप कमजोर रहेंगे तो आप कुछ न कह सकेंगे और न ही कुछ लिख सकेंगे।
आरक्षण पर छात्रा ने पूछा प्रश्न
एक छात्रा ने आरक्षण संबंधी प्रश्न पूछा तो लेखक ने जवाब दिया कि आप ऐसा क्यों मानते हैं कि जिसे आरक्षण मिला है वह अयोग्य है। आपके जिले में बेहतर कार्य करने वाले कई उदाहरण मिल जाएंगे।
एक छात्रा के भक्ति काल के प्रश्न पर लेखक ने कहा कि भक्तिकाल हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग था। क्योंकि इसी युग में ही समाज की बेडिय़ां टूटी, स्त्रियां जो पर्दे में बंद थी। इसी युग में मीराबाई जैसी स्त्रियां समाज में सामने आईं। दलित समाज के लोग भी भक्ति काल में भक्त बनकर समाज में सम्मान पा सके। इसलिए यह काल स्वर्ण काल माना जाता है।
Published on:
24 Nov 2018 04:43 pm
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