
कोटा . प्रदेश का इकलौता खुला विश्वविद्यालय प्रतिनियुक्तियों के भरोसे चलेगा। वर्धमान महावीर खुला विवि (वीएमओयू) के प्रबंध मंडल (बोम) ने परीक्षा नियंत्रक के पद पर स्थाई नियुक्ति करने के अपने पुराने फैसले तक को पलट दिया। वेतन के नाम पर विवि के 171 कर्मचारियों को बांटे गए 3 करोड़ रुपए की वसूली पर भी बोम ने मोहर लगा दी।
परीक्षा से जुड़े काम को बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण मानते हुए प्रबंध मंडल ने 86 वीं बैठक में प्रतिनियुक्ति के लेक्चरार या उपकुलसचिव स्तर के कर्मचारियों को परीक्षा नियंत्रक बनाने पर रोक लगा दी थी। फैसला था कि इस पद पर प्रोफेसर स्तर के शिक्षक की ही तैनाती की जाए। पद को स्थाई और वेतन श्रंखला को अपग्रेड करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने का निणय भी हुआ लेकिन 21 मार्च 2018 को हुई बोम की 95वीं बैठक में फैसला पलट दिया गया।
पुराने फैसले को फिर किया लागू
बोम की 95वीं बैठक में शामिल सदस्यों ने फैसला किया कि परीक्षा नियंत्रक पद को पहले की तरह ही कार्यवाहक व्यवस्था के जरिए भरा जाएगा। उप कुलसचिव स्तर के अधिकारी या असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की जाएगी। सरकारी कॉलेज के शिक्षक को भी कार्यवाहक व्यवस्था के तहत तैनात किया जा सकेगा। बैठक में कनिष्ठ अभियंता (इलेक्ट्रिकल) और सहायक सांख्यिकी अधिकारी के नए पद भी सृजित किए गए, लेकिन इन्हें भी प्रतिनियुक्ति से भरा जाएगा।
171 कर्मचारियों से होगी रिकवरी
'राजस्थान पत्रिका ने 17 मार्च 2018 को सरकार की मंजूरी के बिना वीएमओयू के 171 कर्मचारियों को राज्यपाल सचिवालय के कर्मचारियों के बराबर वेतनमान देने का खुलासा किया। इस पर कुलपति प्रो. अशोक शर्मा ने 20 मार्च को पांच अलग-अलग पत्र जारी कर इन कर्मचारियों का बढ़ा हुआ वेतनमान वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। इसके बाद विवि ने कर्मचारियों से 3 करोड़ रुपए की रिकवरी करने का प्रस्ताव बोम की बैठक में रखा जिसे मंजूरी दे दी गई।
Updated on:
10 Apr 2018, 9:24 AM IST
Published on:
10 Apr 2018, 9:24 AM IST
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