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बैसाखी पर्व : गुरुद्वारा अगमगढ़ साहिब में उमड़ेगा सैलाब

बैसाखी पर्व शनिवार को शहरभर में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस मौके पर शहर के विभिन्न गुरुद्वारों में विशेष आयोजन होंगे।
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कोटा

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Shailendra Tiwari

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Updated: 14 Apr 2018, 2:16 PM IST

Gurudwara

कोटा .

बैसाखी पर्व शनिवार को शहरभर में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है | । इस मौके पर शहर के विभिन्न गुरुद्वारों में विशेष आयोजन हों रहे है । सुबह से ही दीवान सजे हुए है। शबद कीर्तन होंगे। मुख्य आयोजन बूंदी रोड स्थित गुरुद्वारा अगमगढ़ साहिब में हो रहा है । गुरुद्वारा साहिब में गुरुवार को अखंड पाठ साहिब की शुरुआत के साथ ही कार्यक्रम शुरू हो गए।

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प्रबन्ध कमेटी की ओर से सेवादार सुखविंदर सिंह ने बताया कि मुख्य आयोजन शनिवार को होगा। इस मौके पर गुरुद्वारे के जत्थेदार बाबा लक्खा सिंह के सान्निध्य में सुबह 9 बजे से दीवान हॉल में दीवान सजाया जाएगा। स्थानीय व बाहर से हजूरी रागी जत्थे शबद कीर्तन कर संगत को निहाल करेंगे। अमृतसर के सतनाम सिंह , फतेहगढ़ के हरपाल सिंह ढाढी जत्था, ज्ञानी निर्मल सिंह इस मौके शबद कीर्तन व कथा प्रवचन कर संगत को निहाल करेंगे। दोपहर 3 बजे से पंजाब की टीमों के मध्य कबड्डी का मुकाबला होगा। 15 अप्रेल को सुबह 10 बजे अमृत संचार कार्यक्रम होगा। गुरु का अटूट लंगर बरता जाएगा। आयोजन की तैयारियां कर ली गई हैं। इसके अलावा रक्तदान शिविर व अन्य आयोजन भी होंगे।

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गुमानपुरा सिंधी कॉलोनी स्थित रामदास गुरुद्वारा साहिब की ओर से छबील का आयोजन किया जाएगा। गुरुद्वारा प्रबन्ध कमेटी की ओर से सेवादार दौलत सिंह ने बताया कि गुरुद्वारे के पास ही छबील लगाई जाएगी।

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बैसाखी पर्व शनिवार को हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बैसाखी के मौके पर आयोजन होंगे। मुख्य आयोजन गुरुद्वारा अगमगढ़ साहिब में होगा। जत्थेदार बाबा लक्खा सिंह के सान्निध्य में गुरुद्वारा साहिब में शुक्रवार से कार्यक्रम शुरू हो गए। शनिवार को विशेष आयोजन होंगे। इसके अलावा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित अन्य गुरुद्वारों में शबदों की मधुर धुन फिजाओं में घुलेगी। इन गुरुद्वारों में कोई कोई दो दशक पुराना है, कोई 50 साल तो कोई इससे भी प्राचीन। आइये जानते हैं इन गुरुद्वारों की महिमा के बारे में।

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आरकेपुरम
आरकेपुरम गुरुद्वारे के एक ओर बालाजी का मंदिर तो दूसरी ओर मुनि सुव्रतनाथ विराजित। सेवादार मनिंदर सिंह बताते हैं कि 14 वर्ष पुराने गुरुद्वारे की बाबा लक्खा सिंह ने नींव रखवाई। क्षेत्र के करनेल सिंह की भी इसमें भूमिका रही। यहां गुरुग्रन्थ साहिब का प्रकाशोत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाता है। हर रविवार लंगर का आयोजन होता है। अब गुरुद्वारे ने भव्य रूप ले लिया।
विज्ञान नगर
यह गुरुद्वारा 40 वर्ष पुराना है। प्रधान जनरेल सिंह बताते हैं कि गुरुद्वारे की स्थापना में भी आम लोगों का सहयोग रहा। गुरुद्वारा साहिब में सभी पर्व मनाए जाते हैं। गुरता गद्दी पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। सुबह शाम कीर्तन की धुन गूंजती है। विज्ञान नगर के अलावा तलवंडी, अनंतपुरा, बोरखेड़ा समेत विभिन्न जगहों से लोग यहां मत्था टेकने आते हैं।
दादाबाड़ी
सचिव हरमीत सिंह बताते हैं कि 1974 में दादाबाड़ी स्थित गुरुद्वारा साहिब की स्थापना की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गुरुद्वारा साहिब में लिफ्ट लगवाई गई है। संभवतया शहर का पहला गुरुद्वारा है, जहां लिफ्ट लगी है। गुरुद्वारा साहिब में गुरु अर्जुन देव साहब का शहीदी पर्व श्रद्धा से मनाया जाता है। रक्तदान शिविर व अन्य आयोजन होते रहते हैं।
स्टेशन
स्टेशन क्षेत्र स्थित गुरुद्वारा साहिब आजादी से पहले का है। सचिव गुरप्रीत सिंह बताते हैं कि नींव 1943 में रखी गई। 1958 में पंजीकरण कराया गया। तरुमीत सिंह बेदी बताते हैं कि गुरुद्वारे के लिए वरयाम सिंह होरा ने जमीन दी थी। गुरुद्वारे के पहले प्रधान करतार सिंह बेदी थे। गुरप्रीत सिंह के अनुसार यहां बैसाखी व गुरुनानक जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।