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Bakrid 2019: कोटा की इस मंडी में छाए ‘सुल्तान, मिर्जा’ कीमत है सात लाख रूपये

Eid ul Adha 'सुल्तान' और 'मिर्जा' की इस जोड़ी को देखकर हर कोई रह गया हैरान
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कोटा

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Suraksha Rajora

•

Aug 11, 2019

Bakrid 2019: history significance and facts on eid al adha

Bakrid 2019: कोटा की इस मंडी में छाए 'सुल्तान, मिर्जा' कीमत है सात लाख रूपये

बकरा ईद बकरीद , ईद-उल-अजहा या ईद-उल जुहा 12 अगस्‍त को मनाई जाएगी। अल्लाह की राह में कुर्बानी देने के लिए कोटा में मुस्लिम समुदाय के लोग अच्छे से अच्छे और महंगे से महंगे बकरे खरीदने में जुटे हैं लेकिन यहां चर्चा सिर्फ और सिर्फ 'सुल्तान' और 'मिर्जा' नाम दो बकरों की हो रही है।

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12वें महीने धू-अल-हिज्जा की 10 तारीख को बकरीद मनाई जाती है। यह तारीख रमजान के पवित्र महीने के खत्‍म होने के लगभग 70 दिनों के बाद आती है। बकरीद का त्‍योहार मुख्‍य रूप से कुर्बानी के पर्व के रूप में मनाया जाता है। और इसी के मद्देनजर कोटा शहर की बकरा मंडियों में तरह तरह की नस्ल के बकरे बिक्री के लिए आए हुए हैं।

अल्लाह की राह में कुर्बानी देने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग अच्छे से अच्छे और महंगे से महंगे बकरे खरीदने में जुटे हैं लेकिन यहां चर्चा सिर्फ और सिर्फ 'सुल्तान' और 'मिर्जा' नाम दो बकरों की हो रही है ये दोनों बकरे लोगों के आकर्षण के केन्द्र बने हुए हैं इन्हें मध्यप्रदेश के इंदौर से कोटा निवासी कय्यूम कुर्बानी के लिए खरीदकर लाए हैं। गुर्जरी नस्ल के हैं ये दोनों बकरों की कीमत सुनकर आप चौंक जाएंगे। कय्यूम खान ने इन दो बकरों की कीमत चुकाई है पूरे सात लाख रुपए।

सुल्तान और मिर्जा दूसरे अन्य बकरों से हटकर हैं। गुर्जरी नस्ल के इन बकरों का खानपान भी अलग तरह का है। ये दोनों प्रतिदिन तीन-तीन किलो दूध और 250-250 ग्राम मक्खन खाए बिना नहीं रह सकते हैं। इन बकरों की सारसंभाल भी उसी तरीके की जा रही है। इनकी लंबाई और वजन भी दूसरे बकरों के मुकाबले काफी ज्यादा है।

सुल्तान की बकरीद पर दी जाएगी कुर्बानी
इन बकरों के मालिक कय्यूम खान का दावा है कि सुल्तान और मिर्जा दोनों बकरे हाइट और वजन के लिहाज से देशभर की मंडियों में बिक रहे कई नस्लों के बकरों से काफी गुना बेहतर हैं। इनमें से सुल्तान की बकरीद पर कुर्बानी दी जाएगी और मिर्जा को पाला जाएगा।

बकरीद का महत्‍व
बकरीद का दिन फर्ज-ए-कुर्बान का दिन होता है। इस्लाम में गरीबों और मजलूमों का खास ध्यान रखने की परंपरा है।इसी वजह से बकरीद पर भी गरीबों का विशेष ध्यान रखा जाता है. इस दिन कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं। इन तीनों हिस्सों में से एक हिस्सा खुद के लिए और शेष दो हिस्से समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांट दिए जाते है। ऐसा करके मुस्लिम इस बात का पैगाम देते हैं कि अपने दिल की करीबी चीज़ भी हम दूसरों की बेहतरी के लिए अल्लाह की राह में कुर्बान कर देते हैं।