
चंबल में ऊदबिलाव का जलवा, 2 परिवार के 10 सदस्य चट्टानों पर दिखाते हैं करतब, देखने वाले हो जाते हैरान
कोटा. चंबल की वादियों में सिर्फ बाघ, ( tiger ) घडिय़ाल (Alligators ) व मगरमच्छों ( crocodile ) का ही आकर्षण नहीं, चंबल ( Chambal River ) के किनारे ऊदबिलाव ( beaver ) भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। कई वर्षों तक वन्यजीव प्रेमियों की नजरों से ओझल होने के बाद हाल ही में इनकी संख्या पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। अकेले भैंसरोडगढ़़ क्षेत्र ( Bhainsrorgarh Century ) में चंबल ( Chambal Wild Life Sanctuary ) में ये गत दिनों से 10 की संख्या में देखे जा रहे हैं। ऊदबिलाव ( alligators s ) को लेकर विशेष कार्य कर रही वन विभाग ( forest department ) की कर्मचारी प्रेमकंवर शक्तावत व नेचर प्रोमोटर ए एच जैदी की मानें तो यह काफी अद्भुत प्राणी हैं, जिसके चलते इन्हें देखने व कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में कोटा के अलावा अजमेर, दिल्ली, जयपुर समेत अन्य जगहों से लोग आ रहे हैं।
Read More: घर के आंगन में घुसा मगरमच्छ पर किसान ने बरसाई ताबड़तोड़ लाठियां, पीट-पीट कर उतार डाला मौत के घाट
दो परिवार 10 सदस्य
शक्तावत बताती है कि चंबल में इन प्राणियों की उत्साहवद्र्धक संख्या को देखते हुए इस वर्ष इनकी भी गणना की गई। इसमें यह 10 की संख्या में देखे गए। इनके दो परिवार हैं। इनमें से एक में 7 व दूसरे में 3 सदस्य हैं। जैदी बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले तक यहां ऊदबिलाव का एक जोड़ा नजर आया था। हाल ही में उन्होंने एक साथ सात ऊदबिलाव देखे हैं। जैदी के अनुसार 70 के दशक में कुन्हाड़ी क्षेत्र में चंबल में ऊदबिलाव दिखाई दे जाते थे। जैदी मानते हैं कि आरपीएस, जवाहर सागर ( jawahar sagar dam ) व कोटा बैराज ( kota barrage ) की अपस्ट्रीम में अनुमान के तौर पर 100 के करीब ऊदबिलाव हैं।
Read More: खुलासा: गोल्ड लूट गैंग का इन्वेस्टर है तेलिया, मनीष सिंह के इशारे पर हत्याएं करता था कुख्यात शूटर रुदल राय
ऐसे करते हैं आकर्षित
चंबल की गहराई से निकलकर ऊदबिलाव अक्सर किनारे चट्टानों पर आ जाते हैं। इनका मछलियों का शिकार कर उन्हें उछालकर खाने का तरीका विशेष होता है। मछलियों का शिकार, खड़े होकर खतरे को देखना, पानी व चट्टानों पर आ जाना लोगों को आकर्षित करता है।
Manappuram Gold Robbery: आखिर कहां ठिकाने लगाया देशभर से लूटा 500 करोड़ का सोना, अब तेलिया उगलेगा राज
नहीं छोड़ते परिवार, स्वच्छता है पसंद
शक्तावत के अनुसार ऊदबिलाव जल व थल प्राणी है। इसकी लंबाई करीब एक मीटर होती है। इसे जलमानुष भी कहा जाता है। मछलियां इसे विशेष पसंद होती है। इसकी औसत आयु 18 वर्ष है। यह परिवार के साथ रहता है। प्रजनन काल सर्दी में अक्टूबर से दिसम्बर का होता है। जनवरी में बच्चे होते हैं। खासियत यह है कि वयस्क होते ही यह जोड़ा बनाकर पेड़ों की जड़ों, चट्टानों के बीच मांद बनाकर अस्थायी घर बना लेते हैं। बच्चे होने के बाद ये वापस परिवार के साथ आ जाते हैं। इन्हें स्वच्छ पानी पंसद है। इनकी मौजूदगी दिखाती है कि वहां का जल प्रदूषित नहीं है। जहां जल प्रदूषित हो जाता है ये जगह छोड़ देते हैं। आमतौर पर जल में लेकिन कुछ समय के लिए बाहर भी आ जाते हैं।
Read More: अजब-गजब: सांड की अंतिम यात्रा में उमड़ा पूरा गांव, पंचामृत से करवाया स्नान, एक ट्रॉली कपड़े चढ़ाए फिर किया अंतिम संस्कार
क्षेत्र में ऊदबिलाव की मौजूदगी उत्साहित करने वाली है। वन्यजीवों की गणना में इस वर्ष इन्हें भी शामिल किया। इनकी संख्या 10 आई है। पर्यटकों को भी ये खासा प्रभावित कर रहे हैं।
अनुराग भटनागर, सहायक वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग
Published on:
09 Jul 2019 11:27 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
