
कोटा में ब्रिस्टल्ड ग्रास बर्ड
पंख खोलते ही आसमान को नापने के लिए आतुर रहने वाली छोटी सी चिड़िया ब्रिस्टल्ड ग्रास बर्ड... जिसका शुमार अब तेजी से विलुप्त होने की कगार पर खडे़ पक्षियों में किया जाता है। पहली बार हाड़ौती की हरियाली में डेरा जमाती नजर आई है। ब्रिस्टल्ड ग्रास बर्ड दूसरी चिड़ियाओं से कहीं ज्यादा अपनी चहचहाहट और उड़ान से लगाव रखती है, क्योंकि इसी पर उसका अस्तित्व टिका है।
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हवा में ही परवान चढ़ता है प्यार
जनाब, आपने अब तक एक से बढ़कर एक सुंदर, सुरीला और आसमान की ऊंचाइयां नापने वाला पक्षी देखा होगा, लेकिन इससे पहले कभी भी ऐसी चिड़िया नहीं देखी होगी जो आसमान में उड़ान भरते समय तरह तरह की सुरीली आवाजें निकाल कर अपना जीवन साथी चुनती हो। जी, हां हम बात कर रहे ब्रिस्टल्ड ग्रास बर्ड की। इस अनूठी चिड़िया की दूसरी खासियत यह है कि हवा में ही जीवन साथी चुनने के बाद यह उसके साथ मेटिंग भी हवा में ही करती है। आसमान में उड़ान भरते हुए नर ब्रिस्टल्ड ग्रास बर्ड मादा बर्ड को अपनी ओर रिझाने की पहल करता है। यदि फीमेल को आवाजें पसंद आई तो बात आगे बढ़ती है नहीं तो आसमान में ही खत्म समझो।
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अनूठी है मेटिंग का तरीका
हवा में उड़ते हुए फीमेल को दोस्त बना लेना मेल ब्रिस्टल्ड ग्रास बर्ड के लिए आसान नहीं होता। इसके लिए मेल ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड को उड़ते समय खास तौर की आकर्षक आवाजें निकालनी होती हैं, ताकि फीमेल उन्हें सुनकर आकर्षित हो जाए और उसकी ओर खिंची चली आए। मिठास भरी इसी खास आवाज से फीमेल बरबस ही इसकी ओर आकर्षित हो जाती है। सबसे बड़ी बात यह कि इसके बाद यह पक्षी मेटिंग भी हवा में ही करते हैं।
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पूरे प्रदेश में कभी नहीं देखा गया था
हाड़ौती अंचल में पक्षी प्रेमी उस वक्त अचरज में पड़ गए, जब उन्हें दुर्लभ पक्षी ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड का एक जोड़ा देखने को मिला। आमतौर पर यह पक्षी नम, दलदली या लम्बी घांस वाले इलाकों में ही नजर आता हैं। कोलकाता, असम, तमिलनाडु में यह पक्षी सबसे ज्यादा देखा जाता है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों से दूर कोटा में इसे देखकर लोगों का आश्चर्य में पड़ना लाजमी था। इससे पहले इस पक्षी को पूरे प्रदेश में कभी नहीं देखा गया था। उम्मीद है कि यह क्षेत्र नए मेहमान को रास आएगा और वह यहां डेरा जमा लेगा।
शिकार ने खत्म कर दी आबादी
किसी जमाने में भारतीय उपमहाद्वीप के पक्षियों की सबसे बड़ी प्रजाति में शुमार होने वाला यह पक्षी शिकारियों का निशाना बनने के बाद लुप्त होने की कगार पर जा पहुंचा। जिसके बाद अपना जीवन बचाने के लिए ब्रिस्टल्ड ग्रास बर्ड ने अपने पुराने ठिकानों को छोड़कर नए इलाकों का रुख किया। जिसमें से हाड़ौती एक है। इस इलाके की सुरक्षित और मिजाज के मुताबिक परिस्थितियों ने इस विलुप्त प्राय पक्षी को अपनी ओर आकर्षित किया।
सुरक्षा कवज का काम करते हैं बाल
हाड़ौती नेचुर्लिस्ट सोसायटी के सचिव आर एस तोमर व कोषाध्यक्ष मनीष आर्य ने बताया कि यह एक छोटे आकार वाला पक्षी है। इसकी आंखों के पास घासनुमा बाल होते हैं। बालों की मदद से यह घास में छिपे अपने दुश्मनों का आसानी से पता लगा लेते हैं। इस तरह से यह बाल बेहद कलात्मक ढंग से पक्षी की सुरक्षा करते हैं। मेल ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड थोड़ा डार्क व फीमेल लाइट कलर का होती है। गर्दन से सिर के ऊपर तक अनूठी लालिमा लिए होता है। यह छोटे कीड़े खाकर अपना पेट भरता है।
Published on:
09 Aug 2017 04:14 pm

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