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जो दे रहे सफाई की नसीहत उनके ही गलियारे साफ नही

अफसरों की कॉलोनी सिविल लाइंस में नहीं हैं डस्टबिन

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कोटा

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abhishek jain

Jan 03, 2018

PATRIKA

कोटा .

स्मार्ट सिटी के पैरोकार और लोगों को स्वच्छता की नसीहत दे रहे अफसरों के गलियारों में भी सफाई के हालात ठीक नहीं है। नगर निगम का पूरा अमला लगा है। सफाई कर्मचारी, जमादार से लेकर महापौर, निगम आयुक्त तक शहरवासियों को सड़क पर कचरा नहीं फेंकने, अपना घर, मोहल्ला साफ रखने की नसीहत देते नजर आते हैं।

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प्रशासन के उच्च अधिकारी स्वच्छता अभियान के तहत शहर में होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर लोगों को जागरूक करते नजर आते हैं। लेकिन वे अधिकारी अपने घर के आसपास, मोहल्ले में कितीन साफ-सफाई रखते हैं, इसका अंदाजा सिविल लाइन क्षेत्र के सफाई के हालात देखकर लगाया जा सकता है।

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पत्रिका टीम ने मंगलवार को सिविल लाइन्स, सुखधाम कॉलोनी, कलक्ट्री के पीछे ही स्थित सरकारी आवासीय कॉलोनी की सफाई व्यवस्था के दो घंटे तक हालात देखे तो यह नजारा सामने आया ...

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निगम आयुक्त आवास

सर्किट हाउस के पीछे ही स्थित है निगम आयुक्त डॉॅ. विक्रम जिंदल का आवास। बंगले के प्रवेशद्वार के बगल में ही विद्युत पोल लगा है। पास ही करीब एक सप्ताह से मलबे का ढेर लगा है। बंगले के अंदर पेड़ की कटिंग के बाद बागवान ने टहनियां सड़क किनारे डाल दी।

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एएसपी का बंगला

थोड़ा आगे चले तो कौने पर सूखे पत्ते, टहनियां पड़ी नजर आईं। यहां शायद कई दिनों से सफाई नहीं हुई। गली में प्रवेश ही किया ही था कि पता चला कि कौने का बंगला तो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा का है। बंगले के सामने ही पॉलीथिन, कचरा फैला हुआ है।

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कलक्टर बंगले के पास

कलक्टर बंगले के कुछ कदम आगे ही फुटपाथ पर कचरे का ढेर लगा है। बंगले के पीछे स्थित मुख्य सड़क पर आवारा मवेशी घूमते नजर आए। पॉलीथिन, कचरा पड़ा है। लोगों ने बताया कि सफाई कर्मचारी रोजाना सड़क की सफाई कर चला जाता है। कॉलोनी में कहीं भी घर-घर कचरा संग्रहण नहीं होता।

जिला प्रमुख आवास
एक बंगला छोड़ के दूसरा बंगला जिला प्रमुख के नाम आवंटित है। इसके सामने कंटीली झाडिय़ां उगी हुई हैं। पूरी कॉलोनी के लोग कचरा-गंदगी यहीं डालते हैं। इससे यहां ढेर लगे रहते हैं। सड़ांध बनी रहती है। इसके पास ही आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग का दफ्तर भी है। लोगों को आने जाने में दिक्कत होती है।

नहीं आते सफाईकर्मी
आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के कर्मचारी बिरधीलाल सुमन बताते है कि कॉलोनी में सिर्फ हमारा ही दफ्तर है। दफ्तर के बाहर कचरा फैला रहता है। आसपास उच्च अधिकारियों के आवास हैं। किसी से यहां कचरा डालने की मना भी नहीं कर सकते।

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आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के कर्मचारी रामकिशन शर्मा का कहना है की पहले सफाई कर्मचारी भी आते थे, लेकिन छह माह से कोई नहीं आया। दफ्तर के सामने कचरा हमें ही साफ करना पड़ता है।

महापौर महेश विजय का कहना है की शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कचरा प्वाइंट से नियमित रूप से कचरा उठाने की व्यवस्था प्रभावी की जा रही है। आकस्मिक निरीक्षण कर कचरा नहीं उठाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।