
सावधान: खतरनाक बीमारियों से भरा चकाचक दिखने वाला आपका कमरा, सिराहने पर ही मौत करती इंतजार
कोटा. आखिर कौन होगा जो अपने कमरे ( Room ) को चमचमाता नहीं देखना चाहता होगा। खुद तो सफाई करते ही होंगे ऊपर से काम वाली बाई भी रखी होगी, लेकिन सफाई की चुनौती कई मर्तबा आपको मात दे बीमारियों के जाल में फंसा देती है। महज झाड़ पौंछ करने से ही आपका कमरा नहीं चमकता, उसे जरूरत होती है बैक्टीरिया ( bacteria ) और डस्ट फ्री होने की। नेशनल क्लीनअप योर रूम डे ( Clean up your room day ) पर जानिए कैसे साफ रख सकते हैं अपना कमरा... पत्रिका की खास रिपोर्ट।
सफाई की तमाम कोशिशें उस वक्त धराशाई हो जाती हैं, जब आपकी त्वचा पर एलर्जी, रेशेज और खुजली हमला कर देती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी सफाई करने के बावजूद स्किन प्रॉब्लम होती क्यों हैं? त्वचा रोग विशेषज्ञ इसका बेहद आसान जवाब देते हुए आपकी बैडशीट को जिम्मेदार ठहराते हैं। नर्म और मुलायम बिस्तर की चाहत में हम अक्सर सिंथेटिक बैडशीट और कंबल खरीदकर ले आते हैं। सिंथेटिक बिछावन पर धूल के बेहद बारीक कण और बैक्टीरिया एक बार डेरा जमा लेते हैं तो बिना ड्राईक्लीन और वेक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल किए बाहर नहीं निकलते। जबकि सामान्यतौर पर हम इन्हें झाड़कर दोबारा इस्तेमाल कर लेते हैं। नतीजतन, सोने के कुछ देर बाद ही पहले खुजली और फिर रेशेज के साथ स्किन एलर्जी शुरू हो जाती है।
कपड़ों में धूप जरूर लगाएं
आमतौर पर हम गर्मियों से बचने के लिए 16 डिग्री पर एसी तो चला लेते हैं, लेकिन जब कमरा पूरी तरह से चिल्ड हो जाता है तो एसी कम करने के बजाय कंबल का लुफ्त लेने से बाज नहीं आते, जबकि विशेषज्ञ बताते हैं कि कंबल, तकिया और गद्दे में धूल के बारीक कण अंदर तक समा जाते हैं। साथ ही, जरा सी सीलन मिलते ही वह भी इनमें जम जाती है। ऐसे में जिन घरों में अपनी छतें नहीं होती, उनके बाशिंदे इन तीनों चीजों को धूप ही नहीं दिखाते।
धूल और सीलन भरा यह बिस्तर अक्सर सांस और अस्थमा जैसी बीमारियों की गोद में धकेल देता है। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना बच्चों और बुजुर्गों को करना पड़ता है। इसलिए अपने कमरे के बिछावन को वेक्यूम क्लीनर से अच्छी तरह साफ कर नियमित धूप दिखाएं।
Published on:
10 May 2019 08:00 am
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