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चंबल के दीवानों के लिए बुरी खबर: पर्यटकों को मौत के भंवर में धकेलने को तैयार वन विभाग

वन विभाग पर्यटकों की जान से खेलने को तैयार है। किसी की जान से विभाग को लेना देना नहीं। मामला चंबल में बोट चलाने का है।
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कोटा

•

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Zuber Khan

•

May 23, 2018

Kota Tourism

चंबल के दीवानों के लिए बुरी खबर: पर्यटकों को मौत के भंवर में धकेलने को तैयार वन विभाग

कोटा . वन विभाग पर्यटकों की जान से खेलने को तैयार है। किसी की जान से विभाग को लेना देना नहीं। मामला चंबल में बोट चलाने का है। चंबल में बोट संचालन के लिए विभाग की कुछ शर्तें हैं, लेकिन विभाग ने खुद की शर्तों को ही ताक में रख दिया है, और ऐसी बोटों का इस वर्ष के लिए पंजीकरण कर दिया है जो विभाग की ही शर्तों को पूरा नहीं कर रहीं।

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चंबल में बोट चलाने की शर्तों के अनुसार बोट पांच वर्ष या इससे अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए, लेकिन यहां ऐसी बोट भी पंजीकृत कर लीं जो पांच साल से ज्यादा पुरानी हैं। ये बोट बीच भंवर में कभी भी पर्यटकों को धोखा दे सकते हैं। हालांकि फर्मों ने इन बोटों के फिटनेस प्रमाण-पत्र तो दिए हैं, लेकिन विभागीय शर्त को ताक में रखकर ये फर्में वर्षों पुराने बोटों से ही यात्रियों को चंबल की सैर करवाने वाली हैं।

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ऐसे खुली पोल
कार्यालय उप वन संरक्षक, वन्यजीव मुकुन्दरा राष्ट्रीय उद्यान में आरटीआई लगाकर तपेश्वर सिंह भाटी द्वारा चंबल में संचालित की जाने वाली बोटों से सम्बन्धित जानकारी मांगी गई थी। इसमें सामने आया कि वर्ष 2013 में विभाग ने जिस बोट को चलाने के लिए पंजीकृत किया, उसी बोट को संचालित करने के लिए विभाग ने वर्ष 2018 में भी पंजीकृत कर लिया है। यही नहीं, आरजे-20-06 बोट को तो 2002 में भी पंजीकृत किया था, 16 साल पुराने इस बोट को विभाग ने इस साल भी पंजीकृत किया है। एक अन्य बोट-आर जे -20-032 को पंजीकरण 2010 में भी किया गया था, इस बोट को इस वर्ष भी पंजीकृत किया है।

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यह हैं प्रमुख नियम
-नाव व नाव चालक के पास सक्षम अधिकारी द्वारा जारी वैध लाइसेंस एवं -फिटनेस प्रमाण-पत्र हो।
-नाव का विधिवत पंजीकरण हो।
-पर्यटकों का बीमा भी नियमानुसार करवाना होगा।
-5 साल से पुरानी नहीं होनी चाहिए।

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मुख्यवन संरक्षक घनश्याम शर्मा ने बताया कि पांच साल से पुरानी बोट नहीं होनी चाहिए। यह विभाग की शर्तों में शामिल है। यदि पांच साल पुरानी किसी बोट को विभाग ने पंजीकृत किया है तो इसे दिखवाया जाएगा।