
कोटा . नगर विकास न्यास जनता को सब्जबाग दिखा रहा है कि वह शहर को जापान के क्योटो जैसा खूबसूरत बना देगा। पानी, सीवर और सड़क से लेकर पर्यटन विकास की दर्जनों प्रस्तावित योजनाएं शहर की कायापलट कर रख देंगी, लेकिन ये जानकार आप हैरत में पड़ जाएंगे कि इन घोषणाओं को अमली जामा पहनाने के लिए यूआईटी के पास पर्याप्त इंतजाम नहीं है।
बीते एक साल में यूआईटी ने करीब एक अरब की विकास योजनाओं का ऐलान कर दिया। इनमें से आधी से ज्यादा योजनाएं तो ऐसी हैं जिनकी उपयोगिता की जांच नहीं कराई गई। सिर्फ राजनीतिक कारणों से जनता को लुभाने के लिए उनके प्रस्ताव बनाकर घोषणाएं कर दी गई। चुनावी साल में जब तक न्यास के हाथ में पैसा आएगा, तब आचार संहिता हाथ बांध देगी। ऐसे में संभव है अधिकांश घोषणाएं कागजों में ही रह जाएंगी।
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खजाना पड़ा है खाली
घोषणाओं को पूरा करने के लिए 979 करोड़ रुपए से ज्यादा की जरूरत है, लेकिन यूआईटी का खजाना खाली पड़ा है। वित्त वर्ष 2017-18 में यूआईटी को 907 करोड़ रुपए की कमाई की उम्मीद थी, लेकिन यह आंकड़ा 50 फीसदी तक ही अटक कर रह गया है। जबकि पहले से चल रही योजनाओं, विभागीय खर्च और पुराने कर्ज को उतारने में करीब 542 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
दावा : जमीन बेचकर जुटाएंगे पैसा
वित्त वर्ष 2017-18 में की गई घोषणाओं और नए वित्तीय वर्ष के खर्च को पूरा करने के लिए यूआईटी को इस साल डेढ़ अरब रुपए से ज्यादा की जरूरत है। चेयरमैन आरके मेहता कहते हैं कि नई आवासीय और व्यवसायिक योजनाएं लांच करेंगे, जिनसे होने वाली आय के जरिए इन घोषणाओं को पूरा किया जाएगा
हकीकत :जोनल-सेक्टर डवलपमेंट प्लान के बिना कुछ नहीं कर पाएंगे
जोनल और सेक्टर डवलपमेंट प्लान का प्रस्ताव तक तैयार न होने के कारण यूआईटी अगले छह महीनों में कोई भी नई योजना लांच करने की स्थिति में ही नहीं है। इसके बाद भी नई योजनाएं तैयार करने और उन्हें लांच करने में भी छह महीने लगेंगे। यानी पूरा साल घोषणाओं के पूरा होने के इंतजार में ही बीतना तय है।
Published on:
21 Apr 2018, 12:41 PM IST
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