
कोटा .
सर्दी में रात के समय ठिठुरते लोगों को सोने की जगह उपलब्ध कराने के लिए नगर निगम की ओर से शहर में बनाए गए स्थायी और अस्थायी रैन-बसेरों के निरीक्षण में न्यायिक अधिकारियों को वैसे ही हालात मिले जैसा 'पत्रिका' ने बताया था। व्यवस्थाएं अभी तक नहीं सुधरी हैं। सोमवार रात को न्यायिक अधिकारियों ने करीब ढाई घंटे से भी अधिक समय तक रैन बसेरों का निरीक्षण किया तो कोई बंद मिला तो कहीं केयर टेकर ही नहीं था। कोई रैन-बसेरा खाली है जबकि लोग सर्दी में बाहर ठिठुरते हुए सोते मिले।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव जयपुर से आए एसके जैन व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूणज़्कालिक सचिव प्रमोद कुमार शर्मा ने रात 9 से 11.30 बजे तक सभी रैन-बसेरों का निरीक्षण किया। जैन ने बताया कि वे न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हाल ही में शुरू हुए रैन-बसेरे में पहुंचे तो वहां पीने के पानी की पयाज़्प्त सुविधा ही नहीं थी। डीसीएम रोड फ्लाईओवर के नीचे वाला रैन-बसेरा तो बंद मिला। कोटड़ी वाले रैन-बसेरे में केयर टेकर ही नहीं था। यहां लोग सर्दी में खुले में सोते मिले। एमबीएस अस्पताल का रैन-बसेरा खाली पड़ा था, जबकि कुछ लोग बाहर सो रहे थे। इन्हे बाहर से अंदर भेजा गया।
टॉयलेट्स में भरी दवाएं, चौतरफा दुर्गन्ध : जेके लोन अस्पताल के रैन-बसेरे के हाल तो और भी अधिक खराब थे। यहां भी केयर टेकर नहीं मिला। पुरुष रैन-बसेरे के पास बने टायलेट में दवाएं भर रखी हैं। महिलाओं के रैन-बसेरे में कोई नहीं मिला। यहां पानी की टंकी हुई थी। गंदगी व दुर्गन्ध काफी अधिक थी। लोगों को 300 रुपए जमा करवाकर 30 रुपए रोजाना में कम्बल व रजाई किराए से लाने पड़ रहे हैं।
नहीं आए उपायुक्त : न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रमोद शर्मा ने बताया कि जेके लोन अस्पताल के रैन-बसेरे की हालत अधिक खराब होने पर रैन-बसेरा प्रभारी नगर निगम उपायुक्त प्रेम शंकर शर्मा से फोन पर बात की, उन्हें मौके पर आने व साथ निरीक्षण करने को कहा तो उपायुक्त ने वहां आने में असमर्थता जताई।
नहीं सुधरवा सके कलक्टर-आयुक्त : प्रमोद शर्मा ने बताया कि उन्होंने पूर्व में भी रैन-बसेरों का निरीक्षण किया था। उस समय भी काफी अव्यवस्थाएं थी। इनमें सुधार के लिए जिला कलक्टर व नगर निमम आयुक्त को पत्र लिखे थे। इसके बावजूद उनमें कोई सुधार नहीं हुआ। कुछ जगहों पर रजाई गद्दे जरूर बदले हैं लेकिन हालत जस की तस बनी हुई है।
पत्रिका ने कराया था रूबरू : गौरतलब है कि 19 दिसंबर की रात और इसके बाद भी दो रात तक 'राजस्थान पत्रिका' ने रैन-बसेरों के हालात देखे थे। समाचार प्रकाशित कर अव्यवस्थाओं की पोल खोली थी। इसके न्यायिक अधिकारियों ने निरीक्षण किया तो उसमें कोई सुधार नजर नहीं आया।
Updated on:
27 Dec 2017 08:17 am
Published on:
26 Dec 2017 07:01 pm
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