
कोटा. पश्चिम बंगाल में चिकित्सकों के साथ हुई मारपीट ( Beating from doctors in West Bengal ) की घटना की आग राजस्थान ( Rajasthan ) पहुंच गई और इसकी तपन से हाड़ौती ( kota Division ) तप गई। इसका सबसे ज्यदा असर कोटा ( kota ) में देखने को मिला। धरती के भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टर्स के रूठने से सोमवार को अस्पतालों ( Hospitals ) में चिकित्सा व्यवस्थाएं वेन्टीलेटर पर आ गई। निजी अस्पतालों में भी ओपीडी सेवाएं ठप रही। एमबीएस, ( mbs hospital ) जेके लोन ( JK Loan hospital ) व नए अस्पताल ( new medical hospital ) में ओपीडी में सीनियर डॉक्टर्स ने कमान संभाली, लेकिन मरीजों की लम्बी कतारों के बीच वे भी पस्त नजर आए।
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चिकित्सकों देशव्यापी आंदोलन के तहत हाड़ौती में सोमवार को आईएमए के चिकित्सक, मेडिकल कॉलेज से जुड़े रेजीडेंट, सेवारत चिकित्सक संघ से जुड़े चिकित्सक एक साथ हड़ताल पर चले गए। जिससे एक ही दिन में 80 से अधिक ऑपरेशन टले। मरीजों को कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ा। कोटा में अमूमन रोजाना 75 ऑपरेशन होते है। इनमें से 35 टले। झालावाड़ में 21, बूंदी में 6 और बारां में 19 ऑपरेशन टल गए। घंटों इंतजार के बावजूद मरीजों का नम्बर नहीं आया। मरीज उमस भरी गर्मी के चलते पसीने से तरबतर रहे। कई मरीज लम्बी कतारें देखकर बैरंग ही लौट गए। इटावा निवासी महावीर मीणा का बीमारी से एक पैर कट गया। एमबीएस में दिखाने आया था, भीड़ के चलते परिजन वापस ले गए।
आधे ऑपरेशन टले
मेडिकल कॉलेज से जुड़े तीनों बड़े अस्पतालों के रेजीडेंट्स के भी हड़ताल पर जाने से ओपीडी व आईपीडी में असर पड़ा। रेजीडेंट को चिकित्सा सेवाओं की रीढ कहा जाता है। ऐसे में उनके एक दिन के लिए हड़ताल पर चले जाने से चार प्लॉन ऑपरेशन भी टाले गए। जबकि तीनों अस्पतालों में रोजाना सीजिरियन व रूटिन के करीब 75 ऑपरेशन होते हैं। ऐसे में चिकित्सक नहीं होने से 35 ऑपरेशन टाल दिए।