
कोटा डिजिटल डेस्क. 80 और 90 के दशक में जब गैर कांग्रेसी दलों का मेल-जोल हुआ तब भाजपा और जनता दल के बीच हुए समझौते के तहत राजस्थान भाजपा को दिया गया। उस दौरान राजस्थान के चुनावों में भाजपा के नेताओं के अतिरिक्त जनता दल के दिग्गज नेता भी प्रचार करने आते थे। फरवरी 1990 में विधानसभा चुनावों का प्रचार जोर-शोर से जारी था..फिर अचानक उसमें अजगर के एंट्री हो गई और ये अजगर कांग्रेस को निगल गया।
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दरअसल उन दिनों जनता दल के दिग्गज नेता चौधरी देवीलाल चुनाव प्रचार के लिए जयपुर आए हुए थे। एक सभा में उन्होंने नारा दिया, ‘अ से अहीर, ज से जाट, ग से गुर्जर और र से राजपूत मिलकर कांग्र्रेस को निगल जाएंगे। चुनावों में ताऊ का यह नारा हिट रहा । चुनावों में भाजपा और जनता दल के गठबंधन को 1977 जैसी जीत हासिल हुई। भाजपा ने 85 और जनता दल ने 55 सीटें हासिल की। चुनावों के दौरान शाहपुरा (जयपुर) की एक सभा में देवीलाल ये घोषणा भी कर चुके थे कि भैरोंसिंह शेखावत ही राजस्थान के मुख्यमंत्री होंगे। वैसा ही हुआ। किसी ने शेखावत का विरोध नहीं किया।

खट्टे -मीठे संबंध
एक दौर ऐसा भी आया जब शेखावत और देवीलाल के संबंधों में खटास आ गई। राजस्थान में चौधरी देवीलाल की सक्रियता को देख शेखावत ने कटु शब्दों में ये कह दिया था कि वे राजस्थान को हरियाणा का उपनिवेश हर्गिज नहीं बनने देंगे। हालांकि गठबंधन के बाद शेखावत के सुर बदल गए। दोनों नेताओं ने एक ही रथ में होकर जाट बहुल शेखावटी, बीकानेर -चूरू और गंगानगर का दौरा किया। बाद में शेखावत ने देवीलाल के पौते अजयसिंह को अपने गृह क्षेत्र दातारामगढ़ से विधायक भी चुनवाया।