
फोटो: पत्रिका
Kota Weather News: कोटा जिले के दीगोद उपखंड का निमोदा हरिजी गांव सदमे में है। बारिश थमने का बाद धूप भी निकल आई लेकिन गांव की गलियों में अब सिर्फ उजाड़, तबाही और दर्द बाकी है।
यहां तालाब की जाली टूटने से आया पानी का सैलाब गांव की नई बस्ती में इस कदर घुसा कि देखते ही देखते सैकड़ों घर डूब गए। गांव के 250 से ज्यादा घरों में 5 से 10 फीट तक पानी भर गया। लोग जान बचाने के लिए छतों पर चढ़ गए।
'भगवान यह दिन किसी को ना दिखाए, हम तो मरते-मरते बचे हैं', यह शब्द हैं गांव के हर उस परिवार के है, जिसने अपनी गृहस्थी पानी में बहते हुए देखी। राजस्थान पत्रिका ने गांव की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की।
दीगोद उपखंड क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, वह है निमोदा हरिजी गांव। यहां शुक्रवार सुबह तेज बारिश के बीच तालाब की वेस्ट वियर पर ठेकेदार द्वारा लगाई जाली टूटने से आए पानी के सैलाब ने सैकड़ों परिवारों को तबाह कर दिया। स्थिति यह थी शनिवार शाम तक लोगों के घरों में पानी भरा रहा। 2 दिन तक सेना ने मोर्चा सम्भाला था।
दीगोद उपखंड अधिकारी दीपक महावर ने बताया कि गांव में काफी नुकसान हुआ है। इसे लेकर सर्वे के लिए टीमें लगाई हैं जो कुछ मदद हो सकती है वो पहुंचाई जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि निमोदा हरिजी में 21 अगस्त की रात भारी बारिश हुई। 22 अगस्त की सुबह ग्रामीणों की नींद टूटी तो चारो तरफ पानी ही पानी था।
यहां तालाब का पानी जाली टूटने से एक साथ नई बस्ती में घुस गया। कुछ ही मिनटों में मकानों में 8 से 10 फीट तक पानी भर गया। ग्रामीणों का कहना था कि बर्तन, बिस्तर, फर्नीचर, बच्चों की किताबें, स्कूल बैग, जरूरी दस्तावेज भी बह गए। किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
पत्रिका टीम ने गांव में मौके पर हालात देखे। यहां चारों तरफ बर्बादी के निशान नजर आ रहे थे। गांव के बुजुर्ग बनवारी लाल लोधा की आंखों से आंसू रुकते नहीं। उन्होंने कहा कि 50 साल की उम्र हो गई, लेकिन ऐसी भयानक स्थिति कभी नहीं आई।
बच्चों को टांड़ पर बैठाया, जानवरों को संभाला, लेकिन कई बह गए। खाने का दाना तक नहीं बचा। तालाब का पानी घर में ऐसे घुसा कि कुछ नहीं बचा पाए। बच्चों के स्कूल की किताबें, सभी दस्तावेज बह गए।
गौरतलब है कि निमोदा हरिजी की आबादी करीब 7 हजार है। यहां करीब 5400 वोटर हैं। बारिश ने सबसे ज्यादा तबाही गांव की नई बस्ती में मचाई। यहां निमोदा हरिजी पंचायत से 500-700 मीटर दूरी पर तालाब है। तालाब में 4 से 6 हजार बीघा कैचमेंट एरिया का पानी आता है।
21 अगस्त की रात तेज बारिश के बाद 22 अगस्त की सुबह तालाब ओवर फ्लो हो गया। तालाब में मछली पालन के ठेकेदार द्वारा वेस्ट वियर पर लोहे की मजबूत जाली लगा दी, जिससे तालाब ओवरफ्लो हो गया और देखते ही देखते जाली टूटने से एक साथ पानी का सैलाब नई बस्ती में घुस गया। जाली नहीं टूटती तो तालाब भी टूट सकता था, जिससे और अधिक स्थिति बिगड़ सकती थी।
एक बुजुर्ग महिला रोते-रोते बोली कि गैस सिलेंडर, तेल के पीपे, अनाज, राशन, पशुओं का चारा सब बह गया। चूल्हा तक बुझ गया। अब घर में बच्चों को खिलाने के लिए एक दाना नहीं बचा। नंद बिहारी जांगिड़ ने कहा घर के अंदर 5 फीट पानी भर गया। इलेक्ट्रॉनिक सामान, गेहूं-बीज, फर्नीचर सब खराब हो गया। दो दिन बाद भी डेढ़ फीट पानी घर में भरा हुआ था। गांव के ही जगदीश प्रसाद ने बताया कि अचानक तेज बहाव से पानी आता गया। घर के दरवाजे-खिड़कियां सब टूट गए। अंदर रखा सामान बह गया। समय ही नहीं मिला कि सामानों को एकत्रित कर पाएं। लाखों रुपए का नुकसान हो चुका है।
Updated on:
25 Aug 2025 03:03 pm
Published on:
25 Aug 2025 03:02 pm
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