
कोटा. हाड़ौती में बारिश ( Heavy Rain ) अब किसानों के लिए बैरन बन गई है। खेतों में पानी भरने के कारण फसलें नष्ट हो गई है। ( Farm submerged ) कृषि विभाग ने कोटा, बूंदी, बारां तथा झालावाड़ जिले में खराबे का सर्वे करवाने का आदेश दे दिया है। हाड़ौतीभर से जुटाई गई जानकारी के मुताबिक, करीब दो लाख हैक्टेयर में फसलें नष्ट हो गई है। ( Crops destroyed ) इस फसल का उत्पादन मूल्य निकाला जाए तो एक हजार करोड़ से अधिक होगा। ( one thousand crore rupees Loss of Farmers )
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ये है नुकसान का गणित
पत्रिका की संभागभर की टीम ने खेतों में जाकर खराब हुई फसलों का जायजा लिया और किसानों से बात की। किसानों का कहना है कि सबसे ज्यादा नुकसान मक्का, सोयाबीन, उड़द की फसल में हुआ है। हाड़ौती में खरीफ सीजन में करीब 9.50 लाख हैक्टेयर में कुल बुवाई हुई है। अब तक करीब 20 प्रतिशत नुकसान आंका जा रहा है। सोयाबीन का औसत उत्पादन प्रति बीघा 2 से 2.50 क्विंटल होता है। सोयाबीन का औसत भावन 3700 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। प्रति हैक्टेयर करीब 50 हजार मूल्य की सोयाबीन का उत्पादन होता है। इस हिसाब से एक हजार करोड़ का नुकसान माना जा रहा है। हालांकि सिंचित क्षेत्र में डे्रनेज सिस्टम फेल होने के कारण फसलों में नुकसान 50 से 60 फीसदी माना जा रहा है। नहरों के धारों के कारण खेतों से पानी की निकासी नहीं हो रही है, इस कारण फसलें ज्यादा खराब हुई है। राजमार्गों के आसपास के खेत भी लबालब भरे हैं। कोटा में कैथून, सुल्तानपुर, सांगोद क्षेत्र में जलभराव के कारण फसलें तबाह हो गई है।
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कृषि विभाग के कोटा के उप निदेशक के.सी. मीणा ने बताया कि कृषि पर्यवेक्षकों को नुकसान का सर्वे का आदेश दिया जा चुका है, लेकिन बारिश जारी रहने और खेत भरे होने के कारण सर्वे का काम प्रभावित हो रहा है। बूंदी जिले में अधिक खराबा नदी के किनारों के गांवों में हुआ। केशवरायपाटन उपखंड के खेतों में भरे पानी की अब तक निकासी नहीं हो सकी। ऐसे में अब फसलें गलना शुरू हो गईं हैं।
चारों जिलों के उप निदेशकों को खराबे का सर्वे करवाने को कहा है। सोमवार शाम तक नुकसान की प्रारम्भिक रिपोर्ट आ जाएगी। जलभराव वाले क्षेत्र में ज्यादा नुकसान हुआ है।
रामावतार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि खण्ड कोटा