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गडकरी का दिलासा भी नहीं आया काम, मजबूरन उठाना पड़ा यह कदम

पहले दिन धरने पर जुटे 35 गांव के 400 से ज्यादा किसान, आर्बिट्रेटर से तय मुआवजा देने को किसानों ने शुरू किया क्रमिक अनशन
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कोटा

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Dheetendra Kumar Sharma

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Updated: 1 May 2018, 11:37 PM IST

nitin gadkari

कोटा . केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी का दिलासा भी पीडित किसानों का गुस्सा ठंडा नहीं कर पाया। कोरे आश्वासन से नाखुश 35 गांव के 400 से ज्यादा किसानों ने एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ ली। आर्बिट्रेट से तय मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर किसान मंगलवार को क्रमिक अनशन और धरने पर बैठ गए।

आर्बिट्रेटर ने नार्दन बाईपास के लिए अधिग्रहित जमीनों के बदले किसानों को 398475 रुपए प्रति बीघा की दर से मुआवजा देने की सिफारिश की थी, लेकिन एनएचएआई इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में चली गई। मुआवजे को लेकर कानूनी दांव शुरू होने के बाद भी यूआईटी ने नार्दन बाईपास का काम जबरन शुरू करा दिया। जिससे नाराज किसानों ने पहले काम रुकवाने की कोशिश की, लेकिन यूआईटी और एनएचएआई ने विवाद सुलझाने का रास्ता निकालने के बजाय भारी पुलिस जाप्ता तैनात कर दिया। जिससे प्रभावित किसान भड़क गए।

गड़करी के फैसले से भड़के

15 अप्रेल को प्रभावित किसानों ने नार्दन बाईपास पर महापंचायत बुलाई और लाड़पुरा विधायक भवानी सिंह राजावत और यूआईटी के अधिकारियों पर धोखे में रखने का आरोप लगा चुनावी बहिष्कार का ऐलान कर दिया। जिससे घबराए विधायक राजावत किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल लेकर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी से मिलने पहुंचे, लेकिन गड़करी ने समस्या के समाधान का आश्वासन देने के बजाय आर्बिट्रेटर के फैसले पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने बढ़ा हुआ

मुआवजा देने की सिफारिश की जांच के लिए कह किसानों को भड़का दिया।

फिर खोला मोर्चा

केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद भी कोई राहत न मिलती देख मंगलवार को किसान फिर सड़क पर उतर आए। रामलखेड़ी, नौटाना, पीपल्दा, चंद्रेशल, नयागांव तकिया, गावड़ी, गंगायचा, रंगपुर, ब्रजेशपुरा, देवली मच्छियान, खेड़ली पाण्या, रामराज पुरा, खेड़ा रसूलपुर, मानस गांव, घघटाना, ताथेड़, मानपुरा, बोरखंडी, शेखान और अर्जुनपुरा आदि ३५ गांव के करीब ४०० किसानों ने अपना हक हासिल करने के लिए क्रमिक अनशन और धरना शुरू कर आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया।

मिलने लगा समर्थन

पूर्व मंत्री भरत सिंह और आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी भी किसानों का समर्थन करने धरना स्थल पर पहुंच गए। भरत सिंह ने कहा कि वह पार्टी पॉलिटिक्स पीछे छोड़ एक किसान की हैसियत से पीडि़त किसानों का साथ देने आए हैं। जब तक प्रभावित लोगों को उनका हक नहीं मिल जाएगा वह लगातार उनके साथ रहेंगे। वहीं आम आदमी पार्टी और किसान सभा के पदाधिकारियों ने भी किसानों के साथ रोजना धरने पर बैठने का ऐलान किया।

होगा आमरण अनशन

पहले दिन राम खेड़ली के किसान ब्रजराज सिंह, भैरू शंकर गोचर, पीपलदा के देवकरण गुर्जर, ब्रजेश पुरा के घनश्याम मीणा और गांवड़ी के बद्रीलाल मीणा क्रमिक अनशन पर बैठे। नार्दन बाईपास किसान संघर्ष समिति के संयोजक नन्दलाल मीणा और हेमराज नागर ने बताया कि ५ दिन तक ऐसे ही अनशन होगा, उसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई तो अगले पांच दिन महिलाएं अनशन पर बैठेंगी। फिर भी सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो फिर आमरण अनशन किया जाएगा।

यह रहे मौजूद

आंदोलनरत किसानों को पूर्व मंत्री भरत सिंह, किसान नेता कुंदन चीता, किसान सभा के दुलीचंद बौदरा, दिनेश राठौर, एमपी चतर, नवीन पालीवाल, देवा भड़क, चंद्रप्रकाश ऋंगी, मुकुट नागर, बद्रीलाल मीणा, परमानंद सैनी, मनोज गुर्जर, ब्रजराज मीणा, इंद्र कुमार नागर और दीनदयाल नागर आदि किसान नेताओं ने संबोधित किया।