
कोटा. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में ( Flood in kota ) जनजीवन को पटरी पर लाने की कोशिशें जारी हैं, जिनके घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त ( Houses collapsed ) होने से बच गए, उनमें अब चूल्हा जलने लगा है। वहीं आपदा ने जिनसे घरों की छत छीन ली हैं वे अभी भी सदमे में हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि जिंदगी की गाड़ी पटरी पर कैसे लौटेगी। एक ओर घर तबाह हो गया और दूसरी ओर रोजगार से भी वंचित हो गए। कई परिवारों को स्थाई आश्रय और दो वक्त की रोटी कमाने के लिए अभी कड़ी मशक्कत करनी होगी।
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जो परिवार टूटे-फूटे घरों को संवारने में जुटे हैं और इमदाद का जो हौसला मिल रहा है, उससे बस्तियों का माहौल देखकर हरिवंश राय बच्चन की कृति ‘नीड़ का निर्माण फिरÓ की ये पक्तियां याद आ जाती हैं। नाश के दु:ख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख, प्रलय की निस्तब्धता से, सृष्टि का नव गान फिर-फिर, नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्वान फिर…।
राज्यपाल, मुख्यमंत्री, आपदा मंत्री और नगरीय विकास विकास मंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। इसके बाद प्रशासन ने भी लगभग सर्वे का काम पूरा कर लिया है। अभी तक ज्यादातर के खाते में बर्तन और कपड़े खरीदने के लिए आपदा राहत विभाग से मिलने वाली 3800 रुपए की राशि ही उनके खाते में जमा हो पाई है। कुछ पीडि़त ऐसे हैं जो सर्वे में बैंक खाते की जानकारी नहीं दे पाए, उनसे बैंक नाम और शाखा का नाम लेकर खाते का पता लगाकर सहायता जाम कराई जाएगी। लगभग सभी जगह बिजली की आपूर्ति बहाल हो गई है। जिन परिवारों ने घर गीला होने के कारण बिजली चालू नहीं करने का अनुरोध किया है, वहां अभी बिजली चालू नहीं की गई है। गुजराती बस्ती में भी इस कारण अंधेरा है। बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार जब भी गीले घर पूरी तरह सूख जाएंगे और परिवार सुरक्षा को लेकर सतुंष्ट होंगे, तब बिजली चालू कर दी जाएगी। जिला प्रशासन की ओर से रात-दिन सर्वे कार्य जारी है।
जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल खुद अपनी निगरानी में सर्वें की सूची तैयार करवा रहे हैं। उप जिला कलक्टर दिवांशु शर्मा को ड्यूटी सर्वे की निगरानी में लगाई हुई है। सर्वे में 11 दल जुटे हैं। शहर में करीब 4 हजार घर प्रभावित होने का प्रारंभिक अनुमान है। अब बाढ़ के पानी के कम होने के साथ शहर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में क्षतिग्रस्त घरों के पुनर्निर्माण के लिए जो कुछ भी बच गया है, लोग उसे एकत्र करने की कोशिश कर रहे हैं।